Harvard University की विदेशी छात्रों के दाखिले की पात्रता रद्द, भारत समेत कई देशों के विद्यार्थियों पर असर

Santosh Kumar | May 23, 2025 | 11:07 AM IST | 2 mins read

गृह मंत्री ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर सूचित किया कि उसके छात्र और एसईवीपी प्रमाणन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा रहा है।

संघीय एजेंसी ने कहा, "मौजूदा विदेशी छात्र या तो अपना कानूनी दर्जा खो देंगे या उन्हें स्थानांतरित होना पड़ेगा।" (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले प्रशासन ने हार्वर्ड विश्वविद्यालय की विदेशी छात्रों को प्रवेश देने की पात्रता रद्द कर दी है, जिससे विश्वविद्यालय में वर्तमान में नामांकित लगभग 800 भारतीय छात्रों सहित हजारों छात्रों की कानूनी स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।

ट्रंप प्रशासन ने गुरुवार (22 मई) को गृह मंत्रालय को हार्वर्ड विश्वविद्यालय के छात्र और शैक्षणिक विनिमय प्रवेश कार्यक्रम (SEVP) की मान्यता समाप्त करने का आदेश दिया। हार्वर्ड अब विदेशी छात्रों को प्रवेश नहीं दे सकता।

संघीय एजेंसी ने कहा, "मौजूदा विदेशी छात्र या तो अपना कानूनी दर्जा खो देंगे या उन्हें स्थानांतरित होना पड़ेगा।" गृह मंत्री ने विश्वविद्यालय को पत्र लिखकर सूचित किया कि उसके छात्र और एसईवीपी प्रमाणन को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जा रहा है।

हार्वर्ड में पढ़ रहे भारतीय छात्र प्रभावित

इसका असर हार्वर्ड में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों पर भी पड़ सकता है। अभी करीब 10,158 विदेशी छात्र और शोधकर्ता पंजीकृत हैं। आंकड़ों के मुताबिक हार्वर्ड के तहत आने वाले स्कूलों में सत्र 2024-25 में भारत के 788 छात्र और शोधकर्ता पंजीकृत हैं।

हार्वर्ड ग्लोबल सपोर्ट सर्विसेज के मुताबिक, हर साल 500 से 800 भारतीय छात्र वहां पढ़ते हैं। पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में AANHPI आयोग के सलाहकार रहे अजय भूटोरिया ने ट्रंप प्रशासन के इस फैसले पर नाराजगी जताई है।

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स्थानांतरित होने के लिए मजबूर छात्र

अजय भूटोरिया ने कहा कि भारतीय छात्र हर साल अमेरिका की अर्थव्यवस्था में 9 अरब डॉलर से ज्यादा का योगदान देते हैं। वे भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को मजबूत करते हैं और टेक्नोलॉजी, मेडिकल जैसे क्षेत्रों में नए इनोवेशन की अगुवाई करते हैं।

भूटोरिया ने कहा, "यह नीति हार्वर्ड में अध्ययनरत 500 से अधिक भारतीय छात्रों को सीधे तौर पर प्रभावित करेगी, जिससे उन्हें अगले शैक्षणिक वर्ष की शुरूआत से पहले अमेरिका छोड़ने या देश में कहीं और जाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।"

उन्होंने कहा कि मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे शहरों के इन होनहार छात्रों ने हार्वर्ड में पढ़ाई करने के लिए अपने सपने, पैसा और भविष्य का निवेश किया है, लेकिन इस राजनीतिक फैसले ने उनकी उम्मीदों को तोड़ दिया है।

इनपुट-पीटीआई

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