दिल्ली विवि ने सोनम वांगचुक से की अनशन खत्म करने की अपील, कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों की पोस्ट पर छिड़ा विवाद

Press Trust of India | July 23, 2026 | 10:49 PM IST | 2 mins read

राजधानी कॉलेज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी, लेकिन बाद में उसे हटा दिया और सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया।

डीयू ने कहा - हम सोनम वांगचुक से हमारे छात्रों के हित में अनशन समाप्त करने का ईमानदारी से अनुरोध करते हैं। (इमेज-आधिकारिक एक्स/DU)

नई दिल्ली: दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से अनिश्चितकालीन अनशन खत्म करने की बृहस्पतिवार को अपील की और प्रश्नपत्र लीक मामलों में जल्द सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए त्वरित अदालतें स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फैसले का स्वागत किया।

विश्वविद्यालय ने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट में कहा, “हम प्रश्नपत्र लीक में शामिल लोगों के लिए मिसाल कायम करने वाली सजा सुनिश्चित करने के लिए त्वरित अदालतें स्थापित करने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी के फैसले का स्वागत करते हैं। यह सोच-समझकर लिया गया निर्णय दिखाता है कि भारत सरकार युवाओं को अपने कामकाज के केंद्र में रखती है।”

डीयू ने कहा, “सौहार्द और सुधार की भावना के तहत, हम सोनम वांगचुक से हमारे छात्रों के हित में अनशन समाप्त करने का ईमानदारी से अनुरोध करते हैं। हमारे छात्रों का भविष्य ही हमारे राष्ट्र का भविष्य है।” कुछ कॉलेजों के प्राचार्यों द्वारा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के समर्थन में सोशल मीडिया पर किए गए पोस्ट के बाद शिक्षकों और छात्रों के कुछ वर्गों ने इसकी आलोचना की।

राजधानी कॉलेज ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के समर्थन में एक पोस्ट साझा की थी, लेकिन बाद में उसे हटा दिया और सार्वजनिक रूप से माफीनामा जारी किया। कॉलेज प्रशासन ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि उसे अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से साझा की गई पोस्ट पर “गहरा खेद” है। कॉलेज ने कहा कि वह छात्रों के साथ खड़ा है और यह सुनिश्चित करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं कि ऐसी घटना दोबारा न हो।

Also read Paper Leak Row: 10 साल में 152 पेपर लीक; राहुल ने कहा- धर्मेंद्र प्रधान को हटाएं, पीएम छात्रों से मांगें माफी

शहीद भगत सिंह कॉलेज के प्राचार्य के आधिकारिक ‘एक्स’ हैंडल पर इसी तरह की पोस्ट अब भी मौजूद है। उस पोस्ट में लिखा है, “हम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के साथ खड़े हैं, जो राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) को लागू करने और भारत की शिक्षा प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। प्रश्नपत्र लीक के लिए जिम्मेदार लोगों को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है और उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा रही है। आइए संस्थानों को मजबूत करें, उन्हें कमजोर न करें।”

शिक्षकों और छात्रों के कुछ वर्गों ने इन पोस्ट की आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि राजनीतिक रूप से विवादित मुद्दे पर शैक्षणिक संस्थान सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष क्यों रख रहे हैं।

मिरांडा हाउस की शिक्षिका आभा देव हबीब ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्र राजनीतिक समर्थन नहीं, बल्कि जवाब मांग रहे हैं। उन्होंने कहा, “प्रदर्शनकारी छात्र सिर्फ जवाब चाहते हैं, चाहे वह केंद्रीय मंत्री से हो या दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे संस्थानों से। विश्वविद्यालय को इसके बजाय राष्ट्रीय शिक्षा नीति और यूजीसीएफ को लेकर बनी अनिश्चितता को दूर करने पर ध्यान देना चाहिए।”

MakeCAREERS360
My Trusted Source
Add as a preferred source on google
[

विशेष समाचार

]
[

नवीनतम शिक्षा समाचार

]