Press Trust of India | September 4, 2026 | 05:47 PM IST | 2 mins read
अधिकारियों ने बताया कि एसएआईएफ/सीआईएल में उन्नत उपकरण सुविधा से जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की विश्लेषण एवं अनुसंधान क्षमताएं बढ़ेंगी।

नई दिल्ली: उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को पंजाब विश्वविद्यालय का दौरा किया और परिष्कृत विश्लेषणात्मक उपकरण सुविधा/केंद्रीय उपकरण प्रयोगशाला (एसएआईएफ/सीआईएल) में उन्नत उपकरण सुविधा का उद्घाटन किया। विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में राधाकृष्णन का पंजाब विश्वविद्यालय का यह पहला दौरा था।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया और हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष भी इस अवसर पर मौजूद थे। उपराष्ट्रपति के दौरे के मद्देनजर पंजाब विश्वविद्यालय परिसर में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। अधिकारियों ने बताया कि एसएआईएफ/सीआईएल में उन्नत उपकरण सुविधा से जीव विज्ञान, रसायन विज्ञान, भौतिक विज्ञान, इंजीनियरिंग और संबंधित क्षेत्रों में विश्वविद्यालय की विश्लेषण एवं अनुसंधान क्षमताएं बढ़ेंगी।
उन्होंने बताया कि इन उन्नत सुविधाओं से शोधकर्ताओं को अत्याधुनिक विश्लेषणात्मक उपकरणों का इस्तेमाल करने का अवसर मिलेगा और शैक्षणिक, वैज्ञानिक एवं उद्योग से जुड़े विभिन्न प्रकार के अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों के अनुसार, एसएआईएफ/सीआईएल विश्लेषण के लिए देश में सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली सुविधाओं में से एक है और भारत के अनुसंधान संस्थानों एवं उद्योगों में इसके उपयोगकर्ताओं की संख्या भी सबसे अधिक है। उन्होंने बताया कि इस केंद्र में हर साल 30,000 से अधिक नमूनों का विश्लेषण किया जाता है और 7,000 से अधिक लोग इसकी सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं।
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विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) ने देशभर में सबसे अधिक शोधकर्ताओं को सेवाएं देने के लिए एसएआईएफ/सीआईएल को मान्यता दी है। यह पंजाब विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अलावा देशभर के संस्थानों और उद्योगों को भी विश्लेषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराता है।
उपराष्ट्रपति ने पंजाब विश्वविद्यालय प्रौद्योगिकी नवाचार मंच (पीयू टीआईएफ) का भी उद्घाटन किया, जिसे पहले बायोएनईएसटी के नाम से जाना जाता था। यह मंच किसी उद्यम को विकसित करने से पहले, उसके शुरुआती विकास और उसके बाद के चरणों के लिए एकीकृत सहायता उपलब्ध कराता है।
अधिकारियों ने बताया कि इस मंच के जरिये अब तक 85 से अधिक स्टार्टअप, नवोन्मेषकों और उद्यम विकसित करने वालों को सहयोग दिया गया है। इनमें से कई उद्यम तकनीकी विकास के उन्नत स्तर तक पहुंच चुके हैं और पांच उत्पादों का व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू हो चुका है।