Delhi Govt Policy: दिल्ली सरकार डेढ़ महीने के अंदर पेश करेगी पीजी, कोचिंग संस्थानों के नियमन की नीति

Press Trust of India | September 9, 2026 | 10:39 AM IST | 2 mins read

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि छात्रों ने किराए, पीजी संचालकों द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं, समझौतों को लागू करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए।

दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को यह जानकारी दी। (इमेज-एक्स/@ashishsood_bjp)

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार शहर में 'पेइंग गेस्ट' (पीजी) आवास और कोचिंग संस्थानों को नियंत्रित करने के लिए डेढ़ महीने में एक व्यापक नीति और वेब पोर्टल तैयार करेगी। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को यह जानकारी दी। सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना में सात लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने के कुछ दिन बाद सूद ने पीजी में रहने वाले छात्रों से मुलाकात करके उनकी समस्याएं सुनीं।

शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा, "हम इस पर पहले से ही काम कर रहे थे, लेकिन इस दुखद घटना ने हमें गौबा समिति की रिपोर्ट को जल्द लागू करने और एक नीति बनाने के काम में तेजी लाने के लिए मजबूर किया है।"

उन्होंने बताया कि दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के साउथ कैंपस और गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय के अंतर्गत आने वाले पेशेवर कॉलेजों के छात्रों को पीजी में रहने वालों के रूप में अपनी समस्याएं बताने के लिए बुलाया गया था।

Delhi Govt Policy: छात्रों ने सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए

उन्होंने कहा कि छात्रों ने किराए, पीजी संचालकों द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं, समझौतों को लागू करने और सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। सरकार ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रही है, जिसके तहत पीजी आवासों की उपलब्धता, सुविधाओं और सुरक्षा नियमों सहित उनकी जानकारी एक साझा पोर्टल पर दर्ज की जा सके।

उन्होंने कहा, "पीजी की इमारत एक व्यक्ति की हो सकती है, उसे कोई दूसरा व्यक्ति चला सकता है और पैसे कोई तीसरा व्यक्ति इकट्ठा कर सकता है। समझौतों को लागू करना और छात्रों से किए गए वादे के अनुसार सुविधाएं देना बड़ी चिंता का विषय है।"

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एक से डेढ़ महीने के अंदर बनेगी नीति

मंत्री आशीष सूद ने कहा कि नीति को अंतिम रूप देने से पहले सरकार पीजी प्रबंधन, माता-पिता, एजेंसियों, छात्र संगठनों और पानी तथा बिजली से जुड़े विभागों समेत विभिन्न संबंधित पक्षों की राय लेगी।

उन्होंने कहा कि इसके बाद इस प्रस्ताव पर सीएम और उपराज्यपाल के साथ चर्चा की जाएगी और फिर इसे मंत्रिमंडल के सामने रखा जाएगा। सूद ने कहा, "सलाह लेने के बाद एक से डेढ़ महीने के अंदर नीति को जनता के सामने लाने की कोशिश करेंगे।"

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