Press Trust of India | September 8, 2026 | 12:29 PM IST | 2 mins read
सेवा के दौरान बर्खास्त किए जाने या किसी अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति में शिक्षण शुल्क में छूट का लाभ नहीं मिलेगा।

इंदौर: मध्यप्रदेश के इंदौर स्थित देवी अहिल्या विश्वविद्यालय ने सेना के तीनों अंगों में अग्निवीर के रूप में सेवा पूरी करने वाले पूर्व सैनिकों की उच्च शिक्षा की राह आसान करने के लिए उन्हें किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर शिक्षण शुल्क में पूरी छूट देने का निर्णय किया है। विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने यह जानकारी दी। राज्य सरकार के वर्ष 1964 में स्थापित विश्वविद्यालय के कुलगुरु डॉ. राकेश सिंघई ने बताया कि इस फैसले का उद्देश्य पूर्व अग्निवीरों की सहायता करना है।
सिंघई ने कहा, ''अग्निवीर जीवन के 4 साल सेना में बिताते हैं और अक्सर अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाते। हम चाहते हैं कि सेना में सेवाएं देने के बाद वे अपनी उच्च शिक्षा पूरी करके अच्छा रोजगार हासिल करें और नयी जिंदगी शुरू करें।''
कुलगुरु ने बताया कि विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद ने तय किया है कि यदि पूर्व अग्निवीर संस्थान के संचालित करीब 200 पाठ्यक्रमों में से किसी भी पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने में सफल होते हैं, तो उन्हें शिक्षण शुल्क में 100% छूट दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि इस छूट के लिए कोई संख्या निर्धारित नहीं की गई है और जितने भी पात्र पूर्व अग्निवीर आएंगे, उन सबको इसका लाभ मिलेगा। कुलगुरु ने कहा कि पात्रता के लिए अग्निवीरों को सेना में 4 साल का कार्यकाल पूरा करना अनिवार्य है।
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सेवा के दौरान बर्खास्त किए जाने या किसी अन्य अनुशासनात्मक कार्रवाई की स्थिति में शिक्षण शुल्क में छूट का लाभ नहीं मिलेगा। सिंघई ने कहा कि विश्वविद्यालय पूर्व अग्निवीरों को प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण देने पर विचार कर सकता है।
कुलगुरु ने बताया कि सेना के तीनों अंगों में सेवारत कर्मियों की संतानों को विश्वविद्यालय के शिक्षण शुल्क में 50% छूट पहले ही दी जा रही है, जबकि शहीद और सेवानिवृत्त सैनिकों की संतानों के लिए इस शुल्क में 100% छूट का प्रावधान है।
समस्तीपुर में स्थित श्री राम जानकी मेडिकल कॉलेज और हॉस्पिटल और सारण जिले के छपरा में स्थित गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज को 50-50 एमबीबीएस सीटों के लिए मंजूरी मिली है। इससे राज्य में कुल 100 नई एमबीबीएस सीटें जुड़ गई हैं।
Santosh Kumar