Bangladesh Protest: घातक हिंसा, छात्र विरोध के बीच देश छोड़कर भागीं शेख हसीना, पीएम पद से दिया इस्तीफा
Santosh Kumar | August 5, 2024 | 04:48 PM IST | 3 mins read
बांग्लादेश में यह विरोध प्रदर्शन देश की सिविल सेवा नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली में सुधार की मांग के चलते किया जा रहा है, जिसमें विशिष्ट समूहों के लिए पद आरक्षित हैं।
नई दिल्ली: बांग्लादेश में जारी हिंसा और छात्र विरोध के बीच प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस्तीफा दे दिया है। जानकारी के मुताबिक प्रधानमंत्री शेख हसीना देश छोड़कर चली गई हैं। बताया जा रहा है कि रविवार (4 अगस्त) को बांग्लादेश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए जिसमें 106 से ज्यादा लोग मारे गए। इस पूरे प्रकरण के बाद पीएम ने यह कदम उठाया। सेना प्रमुख ने वकार-उज-जमान सोमवार को यह घोषणा की।
सेना प्रमुख ने कहा कि अंतरिम सरकार सत्ता संभालेगी। प्रधानमंत्री हसीना के देश छोड़कर चले जाने की खबरों के बीच उन्होंने टेलीविजन पर दिए गए संबोधन में कहा, "मैं (देश की) सारी जिम्मेदारी ले रहा हूं, कृपया सहयोग करें।" सेना प्रमुख ने कहा कि उन्होंने राजनीतिक नेताओं से मुलाकात की और उन्हें बताया कि सेना कानून और व्यवस्था की जिम्मेदारी लेगी। हालांकि, हसीना की अवामी लीग पार्टी का कोई भी नेता बैठक में मौजूद नहीं था।
समाचार एजेंसी एएनआई के अनुसार, शेख हसीना और उनके कुछ साथियों को लेकर विमान पटना से गुजरा और उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा के पास उसे ट्रैक किया गया। सूत्रों ने बताया कि शीर्ष सुरक्षा अधिकारी स्थिति पर बहुत बारीकी से नजर रख रहे हैं और "सभी रडार सक्रिय हैं और उन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है।"
Bangladesh Protest: छात्रों के विरोध की वजह
एएनआई के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने सोमवार को प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास पर धावा बोल दिया है। बता दें कि बांग्लादेश में यह विरोध प्रदर्शन देश की सिविल सेवा नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली में सुधार की मांग के चलते किया जा रहा है, जिसमें विशिष्ट समूहों के लिए पद आरक्षित हैं।
दरअसल, बांग्लादेश उच्च न्यायालय ने 1971 के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के वंशजों के लिए 30 प्रतिशत सरकारी नौकरी कोटा बहाल करने का फैसला सुनाया था। इसके बाद से हजारों छात्र इस कोटे का विरोध कर रहे हैं।
छात्रों को डर है कि अगर स्वतंत्रता संग्राम के दिग्गजों के परिवारों को 30 प्रतिशत आरक्षण दिया गया तो वे अवसरों से वंचित हो जाएंगे। विरोध प्रदर्शन पुलिस की बर्बरता के खिलाफ शुरू हुआ और बाद में इसमें घायल या मारे गए लोगों के लिए न्याय, हिंसा मुक्त परिसर, और कोटा प्रणाली में सुधार की मांग में बदल गया।
2009 से थी बांग्लादेश की प्रधानमंत्री
बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान की बेटी शेख हसीना 2009 से बांग्लादेश की प्रधानमंत्री थीं। सेना प्रमुख की घोषणा के तुरंत बाद, हसीना को हटाए जाने का जश्न मनाने के लिए सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान की मूर्ति को भी तोड़ दिया और उनके जाने का जश्न मनाया, पीटीआई ने बताया।
इससे पहले रविवार (4 अगस्त) को बांग्लादेश के विभिन्न हिस्सों में प्रधानमंत्री हसीना के इस्तीफे की मांग कर रहे प्रदर्शनकारियों और सत्तारूढ़ अवामी लीग के समर्थकों के बीच झड़पें हुईं, जिसके कारण अधिकारियों को मोबाइल इंटरनेट बंद करना पड़ा और अनिश्चित काल के लिए देशव्यापी कर्फ्यू लगाना पड़ा।
बंगाली भाषा के प्रमुख अखबार प्रोथोम एलो की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की झड़पों में 14 पुलिसकर्मियों सहित कम से कम 101 लोग मारे गए। यह छात्र विवादास्पद कोटा प्रणाली को समाप्त करने की मांग कर रहे थे।
द डेली प्रोथोम अलो की रिपोर्ट के अनुसार, अब तक 11,000 से ज़्यादा लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने देश के राजनीतिक नेतृत्व और सुरक्षा बलों से जीवन के अधिकार और शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा करने का आह्वान किया।
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