उत्तराखंड में 'एक राष्ट्र, एक शिक्षा' की शुरुआत, मदरसा बोर्ड की जगह नया अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण गठित
Press Trust of India | July 2, 2026 | 07:43 PM IST | 3 mins read
उत्तराखंड सरकार ने मदरसा बोर्ड को समाप्त कर 'उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' (USMEA) का गठन किया है, जिसके तहत राज्य के सभी 6 अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थान एक ही नियामक ढांचे में आएंगे।
नई दिल्ली : उत्तराखंड सरकार ने राज्य के मदरसा बोर्ड को आधिकारिक तौर पर समाप्त कर उसकी जगह 'उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण' (USMEA) का गठन किया है। इसके तहत राज्य के सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों को एक ही नियामक ढांचे के अंतर्गत लाया गया है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 1 जुलाई 2026 को देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम में इस नए प्राधिकरण का विधिवत शुभारंभ किया और विभिन्न अल्पसंख्यक शैक्षणिक संस्थानों को मान्यता प्रमाण पत्र भी वितरित किए।
"एक राष्ट्र, एक शिक्षा" की ओर बढ़ते कदम
शुभारंभ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण (USMEA) न केवल उत्तराखंड के लिए बल्कि पूरे देश की शिक्षा प्रणाली के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा। राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) के लागू होने का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जिस तरह यूसीसी "एक राष्ट्र, एक कानून" का प्रतिनिधित्व करता है, उसी तरह यह अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण उत्तराखंड से "एक राष्ट्र, एक शिक्षा" की शुरुआत का प्रतीक है। सरकार का उद्देश्य हर बच्चे को, चाहे वह किसी भी वर्ग, क्षेत्र या समुदाय का हो, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और मजबूत नैतिक मूल्य प्रदान करना है।
आस्था और आधुनिकता के बीच बनेगा संतुलन
सीएम धामी ने स्पष्ट किया कि इस प्राधिकरण की स्थापना का उद्देश्य किसी भी समुदाय की धार्मिक पहचान, परंपराओं या अधिकारों को प्रभावित करना बिल्कुल नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य सभी अल्पसंख्यक समूहों के लिए बेहतर शैक्षणिक अवसरों का विस्तार करना है। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य आस्था और आधुनिकता के बीच एक आदर्श संतुलन बनाना है। अल्पसंख्यक समुदायों के बच्चे अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े रहने के साथ-साथ विज्ञान, गणित, कंप्यूटर, भाषाओं और आधुनिक तकनीकों में भी पूरी तरह पारंगत होने चाहिए।
केवल मान्यता ही नहीं, क्वालिटी पर भी होगा जोर
मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि यह प्राधिकरण केवल मान्यता देने वाली एक संस्था के रूप में काम नहीं करेगा, बल्कि यह स्कूलों में शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने, शिक्षकों के प्रशिक्षण, व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए एक मजबूत तंत्र के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने उम्मीद जताई कि USMEA से हजारों छात्रों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आएगा और उत्तराखंड गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के क्षेत्र में देश का नेतृत्व करेगा।
अब सभी 6 अल्पसंख्यक समुदायों को मिलेगा लाभ
इस नए प्राधिकरण (USMEA) की स्थापना उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा अधिनियम, 2025 के तहत की गई है, जिसे राज्य विधानसभा ने पिछले साल अगस्त में गैरसैंण में आयोजित मानसून सत्र के दौरान पारित किया था और अक्टूबर में इसे राज्यपाल की मंजूरी मिली थी। नए कानून के तहत अब मुस्लिम, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई और पारसी सहित सभी छह अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक संस्थान अल्पसंख्यक दर्जे के पात्र होंगे। इससे पहले उत्तराखंड में इस तरह की मान्यता और व्यवस्था केवल मुस्लिम समुदाय के संस्थानों (मदरसा बोर्ड) तक ही सीमित थी।
ऐसा करने वाला देश का पहला राज्य बना उत्तराखंड
अल्पसंख्यक कल्याण सचिव पराग मधुकर धकाते ने प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि अल्पसंख्यक दर्जा चाहने वाले किसी भी संस्थान को अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करने से पहले राज्य के शिक्षा विभाग से संबद्धता (Affiliation) प्राप्त करनी होगी। उन्होंने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने एकल अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के माध्यम से सभी अधिसूचित अल्पसंख्यक समुदायों के शैक्षणिक संस्थानों के लिए एक समान मान्यता प्रणाली की शुरुआत की है।
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