UGC NET Exam 2026: क्या यूजीसी नेट मामले में अपनी जिम्मेदारी पर कुछ बोलेंगे प्रधानमंत्री - कांग्रेस
Press Trust of India | August 17, 2026 | 12:38 PM IST | 2 mins read
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने जून में आयोजित यूजीसी-नेट 2026 के तीन विषयों अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षा रविवार को दोबारा कराने की घोषणा की।
नई दिल्ली: कांग्रेस ने यूजीसी-नेट के कुछ प्रश्नपत्रों में त्रुटियों और दोबारा परीक्षा की घोषणा को लेकर सोमवार को केंद्र सरकार पर निशाना साधा और सवाल किया कि क्या “लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं को कोसने वाले” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी जिम्मेदारी पर कुछ बोलेंगे। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि आखिर एनटीए की गलती की सजा देश के छात्र क्यों भुगतें।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने जून में आयोजित यूजीसी-नेट 2026 के तीन विषयों अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र की परीक्षा रविवार को दोबारा कराने की घोषणा की। एनटीए ने इन विषयों के प्रश्नपत्रों में त्रुटियों की शिकायत मिलने के बाद यह फैसला लिया है। रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने परीक्षा के करीब दो महीने बाद “खुद माना” है कि अंग्रेजी, वाणिज्य और समाजशास्त्र के प्रश्नपत्रों में तथ्यात्मक, मुद्रण संबंधी और अनुवाद संबंधी त्रुटियां थीं।
उन्होंने कहा, “प्रमुख विद्वानों के नाम गलत लिखे गए, किताबों के शीर्षक बिगाड़ दिए गए, प्रश्नों की भाषा में त्रुटियां थीं, व्याकरण संबंधी और लिंग-वचन सामंजस्य की गलतियां थीं, विराम चिह्नों की गलतियां थीं और स्थापित अवधारणाओं के लिए गैर-मानक शब्दों का इस्तेमाल किया गया।'' कांग्रेस महासचिव ने कहा कि राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी की समिति ने ''बड़ी संख्या में ऐसे प्रश्न भी दोहराए गए जो पहले की परीक्षा में पूछे जा चुके थे।”
उन्होंने कहा कि अब इन तीन विषयों की परीक्षा 9 और 10 सितंबर को दोबारा होगी और सवाल उठाया, “हमारा सवाल है कि एनटीए की गलती की सजा देश के छात्र क्यों भुगतें?” रमेश ने सवाल किया, “क्या इतनी गंभीर गलतियों का पता चलने में करीब दो महीने लगते हैं?” उन्होंने कहा, “इस देरी के कारण जो छात्र विभिन्न विश्वविद्यालयों में इस साल के शैक्षणिक सत्र में प्रवेश से वंचित हो जाएंगे, उनके नुकसान की भरपाई कैसे होगी और कौन करेगा?”
कांग्रेस नेता ने कहा, “सवाल सिर्फ यह नहीं है कि परीक्षा दोबारा क्यों हो रही है। सवाल यह है कि इतनी गंभीर त्रुटियों वाला प्रश्नपत्र तैयार और मंजूर कैसे हुआ?” उन्होंने पूछा, “लाखों युवाओं के करियर से जुड़ी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा में ऐसी लापरवाही की जिम्मेदारी किसकी है? परीक्षा प्रणाली में गलती की कीमत अभ्यर्थी क्यों चुकाएं?” रमेश ने कहा कि सवाल केवल इन तीन विषयों के हजारों छात्रों का नहीं है। उन्होंने कहा, “सरकार को बताना चाहिए कि 84 अन्य विषयों में परीक्षा दे चुके कई हजार अभ्यर्थियों के परिणाम में देरी क्यों हुई?
उन्होंने कहा, “जिन युवाओं ने जून में परीक्षा दी, उनके लिए हर दिन महत्वपूर्ण है। परिणाम से जेआरएफ, सहायक प्रोफेसर की पात्रता और पीएचडी में दाखिले जैसे अवसर जुड़े हैं।” कांग्रेस महासचिव ने प्रधानमंत्री पर निशाना साधते हुए कहा, “लाल किले की प्राचीर से देश के युवाओं को कोसने वाले प्रधानमंत्री क्या अपनी जिम्मेदारी पर कुछ बोलेंगे? देश का युवा जवाब चाहता है।”
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