School News: देश भर में 1 शिक्षक के भरोसे चल रहे एक लाख से ज्यादा स्कूल, सरकार ने राज्यसभा में दी जानकारी
Saurabh Pandey | July 30, 2026 | 01:41 PM IST | 2 mins read
ये आंकड़े शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने राज्यसभा में शिक्षकों की खाली जगहों के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में दिए। हालांकि प्रश्न में विशेष रूप से सरकारी स्कूलों के आंकड़े मांगे गए थे।
नई दिल्ली : भारत सरकार द्वारा जारी सरकारी आंकड़ों से पता चला है कि पूरे देशभर में एक लाख से ज्यादा स्कूल सिर्फ एक शिक्षक के भरोसे चल रहे हैं। ये आंकड़े शिक्षकों की तैनाती में बड़ी कमी को दिखाता है, जबकि देश का कुल छात्र-शिक्षक अनुपात राष्ट्रीय मानकों के दायरे में है।
शिक्षा के लिए एकीकृत जिला सूचना प्रणाली प्लस (UDISE+) के 2025-26 के डेटा के अनुसार, भारत में सभी मैनेजमेंट कैटेगरी में कुल 1,00,843 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें सिर्फ एक शिक्षक है। आंध्र प्रदेश इस लिस्ट में सबसे ऊपर है, जहां ऐसे 16,357 स्कूल हैं, जो देश के कुल ऐसे स्कूलों का 16% से ज्यादा है। इसके बाद झारखंड (9,827 स्कूल) और महाराष्ट्र (9,269 स्कूल) का नंबर आता है।
कर्नाटक में 8,042, उत्तर प्रदेश में 7,874, राजस्थान में 7,200 और पश्चिम बंगाल में 6,769 ऐसे स्कूल हैं। इन सात राज्यों में मिलकर देश के ऐसे कुल स्कूलों का लगभग 65% हिस्सा है जो सिर्फ एक शि7क के भरोसे चल रहे हैं।
देश के सभी राज्यों में शिक्षकों की कमी
यह समस्या सिर्फ गरीब या भौगोलिक रूप से मुश्किल इलाकों वाले राज्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि अलग-अलग क्षेत्रों में फैली हुई है। तमिलनाडु में ऐसे 3,957 स्कूल हैं और असम में 3,159, तेलंगाना में 4,793, हिमाचल प्रदेश में 3,128, उत्तराखंड में 2,655 और छत्तीसगढ़ में 2,461 स्कूल हैं। दूसरी तरफ, केरल में 67, नागालैंड में 35, सिक्किम में 31, लद्दाख में 28, दिल्ली में सात और अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक सिंगल-टीचर स्कूल की जानकारी मिली है।
शिक्षा राज्य मंत्री ने दी जानकारी
शिक्षा राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने शिक्षकों की रिक्तियों से संबंधित राज्यसभा के एक प्रश्न के उत्तर में ये आंकड़े उपलब्ध कराए। हालांकि प्रश्न में विशेष रूप से सरकारी स्कूलों के आंकड़े मांगे गए थे, लेकिन एकल-शिक्षक संस्थानों से संबंधित परिशिष्ट में सभी प्रबंधनों के अंतर्गत आने वाले स्कूलों को शामिल किया गया है। मंत्रालय ने राज्यवार स्वीकृत पदों या रिक्तियों का विवरण नहीं दिया, यह कहते हुए कि शिक्षकों की भर्ती, सेवा शर्तें और तैनाती राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन द्वारा की जाती है।
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मंत्रालय ने रिक्तियों का कारण बताया
मंत्रालय ने रिक्तियों का कारण सेवानिवृत्ति, इस्तीफे, पदों का सृजन, कर्मचारियों की संख्या में कमी और नामांकन में बदलाव बताया, जिसमें ग्रामीण, आदिवासी और आकांक्षी जिले भी शामिल हैं। सरकार ने कहा कि राज्यों को नियमित रूप से पारदर्शी, योग्यता-आधारित भर्ती के माध्यम से पदों को भरने और शिक्षकों की आवश्यकता का पूर्वानुमान लगाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की सलाह दी जाती है। निर्धारित विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात बनाए रखने के लिए समग्र शिक्षा के तहत वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाती है।
UDISE+ 2025-26 की रिपोर्ट और आधिकारिक सूचना के अनुसार, देश भर के सरकारी स्कूलों में प्राइमरी, अपर प्राइमरी, सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी लेवल पर 51 लाख से ज्यादा शिक्षक हैं।
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