Press Trust of India | November 1, 2026 | 06:01 PM IST | 1 min read
अदालत ने यह भी कहा कि इस आदेश का लाभ समान स्थिति वाले सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिया जाए और इसे केवल उन अभ्यर्थियों तक सीमित न रखा जाए, जिन्होंने स्वीकार्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था।

नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad HC) ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 (UPTET 2026) के दो प्रश्नों (36 और 37) को मूल्यांकन से बाहर करने का निर्देश दिया है। आयोग ने अपनी अंतिम उत्तर कुंजी में इन दोनों प्रश्नों के लिए दो-दो सही विकल्प स्वीकार किए थे।
यह आदेश न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने विजय सोनकर और तीन अन्य अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद दिया। अदालत ने आयोग को याचिकाकर्ताओं के अंकों की फिर से गणना करने और उनके परीक्षा परिणामों तथा अंकपत्रों में संशोधन करने का निर्देश दिया।
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश का लाभ समान स्थिति वाले सभी अभ्यर्थियों को समान रूप से दिया जाए और इसे केवल उन अभ्यर्थियों तक सीमित न रखा जाए, जिन्होंने स्वीकार्य विकल्पों में से किसी एक को चुना था।
अदालत ने निर्देश दिया कि इस प्रश्नपत्र में कुल 148 प्रश्न ही माने जाएं और इसी आधार पर निर्धारित प्रतिशत के अनुसार अर्हता अंक की गणना की जाए। याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि चारों याचिकाकर्ताओं को अयोग्य घोषित कर दिया गया था, क्योंकि उनके अंक 82 के निर्धारित अर्हता अंकों से कुछ कम थे।
इसीलिए उन्होंने प्रश्नपत्र के मुख्य संस्करण के प्रश्न संख्या 36 और 37 के लिए अपने पक्ष में अंक दिए जाने का अनुरोध करते हुए अदालत का रुख किया था।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 28 अक्टूबर को दिए अपने फैसले में यह भी कहा कि आयोग इसी प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 38 को पहले ही मूल्यांकन से हटा चुका था, ऐसे में इन दो विवादित प्रश्नों के साथ अलग-अलग व्यवहार करने का कोई तर्कसंगत आधार नहीं था।