Santosh Kumar | July 29, 2026 | 07:00 PM IST | 2 mins read
आवेदन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख 4 अगस्त है और आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट लेने की लास्ट डेट 5 अगस्त है। आवेदन ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश बेसिक एजुकेशन बोर्ड (यूपीबीईबी) ने डीएलएड (डिप्लोमा इन एलिमेंट्री एजुकेशन) 2026-28 सेशन के लिए एडमिशन विंडो फिर से खोल दी है। इच्छुक उम्मीदवार 3 अगस्त तक ऑफिशियल वेबसाइट updeled.gov.in के माध्यम से ऑनलाइन यूपी डीएलएड 2026 एप्लीकेशन फॉर्म भर सकते हैं। बोर्ड की ओर से इस संबंध में संशोधित शेड्यूल जारी किया गया है।
यह विंडो उन उम्मीदवारों के लिए फिर से खोली गई है जिन्होंने पहले फॉर्म नहीं भरा या जिन्हें तकनीकी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। बोर्ड ने साफ कर दिया है कि यह अंतिम मौका है। आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन करना होगा।
यूपी डीएलएड 2026 ऑनलाइन एप्लीकेशन के लिए एजुकेशनल क्वालिफिकेशन, उम्र, एप्लीकेशन फीस, सिलेक्शन क्राइटेरिया और दूसरी शर्तों के साथ जनरल और ऑपरेशनल गाइडलाइंस आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध हैं।
डीएलएड कोर्स 2 साल का प्रोग्राम है जो प्राइमरी लेवल पर टीचर बनने के लिए है। सफल कैंडिडेट्स सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के स्कूलों में टीचिंग पोस्ट के लिए योग्य होंगे। कोर्स में एडमिशन मेरिट और काउंसलिंग के आधार पर होगा।
आवेदन शुल्क जमा करने की आखिरी तारीख 4 अगस्त है और आवेदन फॉर्म का प्रिंटआउट लेने की लास्ट डेट 5 अगस्त है। आवेदन ऑनलाइन माध्यम से ही स्वीकार किए जाएंगे, पहले से जारी सभी नियम और शर्तें लागू रहेंगी।
यूपी डीएलएड एडमिशन 2025 फॉर्म की फीस जनरल और ओबीसी कैटेगरी के लिए ₹700, एससी/एसटी के लिए ₹500, और दिव्यांग (पीडबल्यूडी) के लिए ₹200 है। पेमेंट डेबिट/क्रेडिट कार्ड, नेट बैंकिंग, या यूपीआई से किया जा सकता है।
यूपी डीएलएड ऑनलाइन एप्लीकेशन में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। इसलिए, अप्लाई करते समय, कैंडिडेट्स को फाइनल रजिस्ट्रेशन फॉर्म सेव करने से पहले अपनी ऑनलाइन एंट्री को ओरिजिनल रिकॉर्ड से वेरिफाई करना होगा।
यूपी डीएलएड ट्रेनिंग 2025 के लिए अप्लाई करने से पहले सभी इंस्ट्रक्शन पढ़ लें। उत्तर प्रदेश के कैंडिडेट को छोड़कर बाकी सभी कैंडिडेट अनरिजर्व्ड माने जाएंगे; ऐसे कैंडिडेट किसी भी रिजर्वेशन के लिए एलिजिबल नहीं होंगे।
कुछ शिक्षकों ने इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप प्रगतिशील कदम बताया है, जबकि अन्य ने चेतावनी दी है कि इससे शोध की बुनियाद कमजोर हो सकती है और प्रवेश प्रक्रिया में अस्पष्टता पैदा हो सकती है।
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