Bihar Doctor Jobs: पटना एचसी ने चिकित्सकों के रिक्त पद भरने के लिए राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को दिया निर्देश
Press Trust of India | January 20, 2026 | 12:34 PM IST | 2 mins read
पटना हाई कोर्ट ने कहा कि आदेश की एक प्रति एनएमसी के सचिव को भेजी जाए ताकि अदालत की टिप्पणियों को लागू किया जा सके और यह प्रक्रिया अधिकतम छह महीने के भीतर पूरी की जाए।
नई दिल्ली: बिहार में स्वास्थ्य विभागों की “जर्जर हालत” पर चिंता जताते हुए पटना उच्च न्यायालय (Patna HC) ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) को निर्देश दिया कि वह “बड़ी संख्या में खाली पड़े चिकित्सकों के पदों” को समयबद्ध तरीके से भरना सुनिश्चित करे। न्यायमूर्ति विवेक चौधरी ने बिहार के विभिन्न हिस्सों से आए कई चिकित्सकों द्वारा दायर याचिकाओं के समूह पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
राज्य के विभिन्न चिकित्सा महाविद्यालयों और अस्पतालों में कार्यरत इन याचिकाकर्ताओं ने आयोग के 17 अप्रैल 2025 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत फैकल्टी सदस्यों की उपस्थिति दर्ज करने के लिए चेहरे के आधार पर पहचान और जीपीएस लोकेशन साझा करना अनिवार्य कर दिया गया था।
अदालत ने हालांकि याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि “निजता के अधिकार के उल्लंघन का मुद्दा उठाने के अलावा याचिकाकर्ताओं ने आधार से जुड़ी बायोमेट्रिक प्रणाली को चुनौती देने के लिए कोई अन्य ठोस आधार नहीं रखा है।”
अदालत ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा, “यह अदालत इस बात से अनभिज्ञ नहीं है कि अगर किसी चिकित्सा अधिकारी या फैकल्टी सदस्य को लगातार 24 घंटे, 48 घंटे या यहां तक कि 72 घंटे तक काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, तो ऐसे अधिक बोझ से दबे, अगर प्रताड़ित नहीं कहें तो, फैकल्टी सदस्यों का भाग जाना बना रहेगा।”
अदालत ने 17 जनवरी को अपने फैसले में यह भी इंगित किया कि राज्य संचालित और सरकारी सहायता प्राप्त चिकित्सा महाविद्यालयों में अपर्याप्त संख्या में फैकल्टी सदस्यों, अक्षम संविदा शिक्षकों और प्रयोगशाला तकनीशियनों व प्रशासनिक कर्मचारियों की कम संख्या के सहारे चल रहे हैं।
अदालत ने कहा, “केवल फैकल्टी सदस्यों की उपस्थिति सुनिश्चित करने से राज्य के स्वास्थ्य विभागों की जर्जर हालत नहीं सुधरेगी और हालात तभी सुधरेंगे जब “रिक्त पदों को भरा जाएगा।”
उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया, “आयोग को उपयुक्त कार्रवाई करते हुए राज्य सरकारों को यह निर्देश देना चाहिए कि वे चिकित्सा शिक्षण सेवा में बड़ी संख्या में खाली पड़े पदों को भरने के लिए समयबद्ध अवधि के भीतर नियुक्ति/भर्ती अभियान शुरू करें।”
पटना हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि आदेश की एक प्रति राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग के सचिव को भेजी जाए ताकि अदालत की टिप्पणियों को लागू किया जा सके और यह प्रक्रिया अधिकतम छह महीने के भीतर पूरी की जाए।
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