उत्तराखंड के रुद्रपुर में एनसीईआरटी की करीब 10 लाख नकली किताबें जब्त, फेक वॉटरमार्क का इस्तेमाल
Press Trust of India | March 18, 2026 | 11:04 AM IST | 2 mins read
मुखबिर से मिली एक सूचना के आधार पर की गयी कार्रवाई में कुल 9,74,085 नकली किताबें बरामद हुईं जिनकी अनुमानित कीमत 9-10 करोड़ रुपये है।
रुद्रपुर: उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर जिले के जिला मुख्यालय रुद्रपुर में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की करीब 10 लाख नकली किताबें बरामद की हैं। पुलिस ने यह जानकारी दी। राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दीपम सेठ ने फर्जीवाड़े का खुलासा करने वाली टीम को बीस हजार रुपये का इनाम देने की घोषणा की है।
ऊधमसिंह नगर जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने यहां बताया कि मुखबिर से मिली एक सूचना के आधार पर की गयी कार्रवाई में कुल 9,74,085 नकली किताबें बरामद हुईं जिनकी अनुमानित कीमत 9-10 करोड़ रुपये है।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने बताया कि 14 मार्च की रात आनंदम रिजॉर्ट के पास एक कैंटर को रोका गया जिसके चालक ने उसमें किताबें लदी होने तथा उन्हें उत्तर प्रदेश के मेरठ ले जाए जाने की जानकारी दी।
Fake NCERT Books: जांच करने पर किताबें नकली पाई गईं
एसएसपी ने बताया कि जांच के दौरान किताबों से संबंधित दस्तावेज संदिग्ध पाए गए जबकि उसके पास ई-वे बिल भी नहीं था। उन्होंने कहा कि संदेह के आधार पर जब चालक से सख्ती से पूछताछ की गयी तो यह बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया।
गणपति ने बताया कि चालक की निशानदेही पर पुलिस टीम कीरतपुर कोलड़ा स्थित एक गोदाम तक पहुंची जहां एनसीईआरटी की करीब साढे़ नौ लाख किताबें मिलीं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने भी जांच में किताबों को नकली बताया।
पुलिस अधीक्षक अजय गणपति ने आगे बताया कि इसके बाद एनसीईआरटी को मामले की सूचना दी गयी जिसके अधिकारियों की एक टीम सोमवार को दिल्ली से यहां पहुंची और किताबों की जांच की।
Fake NCERT Books Seized: फर्जी वाटरमार्क का इस्तेमाल किया गया
उन्होंने बताया कि जांच में पाया गया कि उन किताबों की छपाई, कागज, बाइंडिंग और कवर डिजाइन एनसीईआरटी के मानकों के अनुरूप नहीं है और उसके असली वाटरमार्क की जगह फर्जी वाटरमार्क बनाकर "एसीईआरटी" लिख दिया गया है।
अजय गणपति ने बताया कि कैंटर और गोदाम से कुल मिलाकर 9,74,085 नकली किताबें बरामद हुई हैं, जिनकी अनुमानित कीमत नौ-10 करोड़ रुपये आंकी गयी है।
खुलासा करने वाली टीम को पुरस्कृत किया गया
गणपति ने बताया कि एनसीईआरटी टीम द्वारा दी गयी रिपोर्ट के आधार पर गोदाम का संचालन कर रहे संदीप और अन्य के विरूद्ध बीएनएस की धारा 318 (4)/336 (3)/338/340(2) तथा कॉपीराइट अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।
एसएसपी ने कहा कि इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है। उधर, देहरादून में डीजीपी सेठ ने मामले का खुलासा करने वाली टीम की सराहना करते हुए उसे 20 हजार रुपये की धनराशि से पुरस्कृत करने की घोषणा की है।
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