Santosh Kumar | April 3, 2026 | 05:14 PM IST | 2 mins read
मंत्रालय ने कहा है कि एनसीईआरटी अनुसंधान कार्यक्रम, 'डॉक्टोरल' कार्यक्रम और अभिनव शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए उचित कदम उठाएगा।

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) को औपचारिक रूप से मानद विश्वविद्यालय घोषित कर दिया गया है, जिससे उसे अपनी खुद की डिग्री देने का अधिकार मिल गया है। इस संबंध में जारी आधिकारिक अधिसूचना में कहा गया, ''शिक्षा मंत्रालय ने, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की सलाह पर एनसीईआरटी और इसकी 6 घटक इकाइयों को एक विशिष्ट श्रेणी के अंतर्गत मानद विश्वविद्यालय घोषित किया है।'' इन घटक इकाइयों में अजमेर, भोपाल, भुवनेश्वर, मैसुरु और शिलांग स्थित क्षेत्रीय शिक्षा संस्थान तथा भोपाल स्थित पंडित सुंदरलाल शर्मा केंद्रीय व्यावसायिक शिक्षा संस्थान शामिल हैं।
स्कूली शिक्षा के लिए एनसीईआरटी विभिन्न गतिविधियां और कार्यक्रम संचालित करती है, जिनमें शैक्षिक अनुसंधान और नवाचार, पाठ्यक्रम विकास, तथा पाठ्य सामग्री एवं शिक्षण-अध्ययन सामग्री का विकास शामिल है।
तीन साल पहले, केंद्र ने 'नई पहल' श्रेणी के तहत एनसीईआरटी को 'डीम्ड-टू-बी-यूनिवर्सिटी' का दर्जा देने की मंजूरी दी थी। इस दर्जे को प्रदान करने के संबंध में अधिसूचना में कुछ शर्तें सूचीबद्ध की गई हैं।
इस अधिसूचना में यह अनिवार्य किया गया है कि एनसीईआरटी देश के भीतर या देश के बाहर स्थित परिसरों में नए कार्यक्रम ''केवल यूजीसी द्वारा समय-समय पर इस विषय पर जारी किए गए मानदंडों और दिशानिर्देशों के अनुसार ही'' शुरू करे।
एनसीईआरटी के आरईआई द्वारा प्रस्तुत किए जाने वाले यूजी और पीजी प्रोग्राम बरकतुल्ला विश्वविद्यालय, एमडीएस विश्वविद्यालय, मैसूर विश्वविद्यालय, उत्कल विश्वविद्यालय और उत्तर-पूर्वी पर्वतीय विश्वविद्यालय जैसे स्थानीय विश्वविद्यालयों से संबद्ध हैं।
मंत्रालय ने कहा है कि एनसीईआरटी अनुसंधान कार्यक्रम, 'डॉक्टोरल' कार्यक्रम और अभिनव शैक्षणिक कार्यक्रम शुरू करने के लिए उचित कदम उठाएगा। सरकार ने कहा है कि एनसीईआरटी एनआईआरएफ रैंकिंग में भाग लेना शुरू करे।
इससे यह भी कहा गया है कि वह ''अनिवार्य रूप से'' 'एकेडमिक बैंक ऑफ़ क्रेडिट्स' (एबीसी) बनाए, अपने छात्रों की पहचान तैयार करे, और उनके 'क्रेडिट स्कोर' को डिजिटल लॉकर में अपलोड करे, जो एबीसी पोर्टल पर दिखाई दे सकें।
मुर्मू ने विश्वविद्यालय की ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्धता की सराहना की। ‘नेट जीरो’ उत्सर्जन का मतलब है कि जो जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उतना ही कार्बन खत्म करने की व्यवस्था भी करे।
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