CBSE OSM Controversy: सीबीएसई की ओएसएम प्रणाली के खिलाफ एनएसयूआई ने दिल्ली उच्च न्यायालय में दायर की याचिका
Press Trust of India | June 2, 2026 | 05:29 PM IST | 2 mins read
एनएसयूआई की ओर से दायर जनहित याचिका में शिकायतकर्ता छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का ऑफलाइन पुनर्मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन करने का अनुरोध किया गया है।
नई दिल्ली: कांग्रेस की छात्र शाखा एनएसयूआई ने 12वीं कक्षा के लिए सीबीएसआई की 'ऑन- स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) प्रणाली में बड़े पैमाने पर हुईं कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच का अनुरोध करते हुए दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। ओएसएम उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन की एक डिजिटल प्रणाली है, जिसमें छात्रों की कॉपियों को स्कैन कर ऑनलाइन अपलोड किया जाता है और परीक्षक कंप्यूटर स्क्रीन पर उन्हें जांचकर अंक देते हैं।
नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) की ओर से दायर जनहित याचिका में शिकायतकर्ता छात्रों की उत्तर पुस्तिकाओं का ऑफलाइन पुनर्मूल्यांकन और भौतिक सत्यापन करने का अनुरोध किया गया है।
CBSE OSM Controversy: 8 जून को मामले की सुनवाई संभव
न्यायालय की अवकाशकालीन पीठ 8 जून को मामले की सुनवाई कर सकती है। याचिका में 1 महीने तक उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन के लिए सीबीएसई पोर्टल खुला रखने का निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
एनएसयूआई ने कहा कि इस वर्ष कक्षा 12 के परिणामों में समग्र प्रदर्शन में आई भारी गिरावट ने छात्रों और अभिभावकों के बीच ओएसएम प्रणाली की निष्पक्षता, एकरूपता और विश्वसनीयता को लेकर व्यापक चिंता पैदा कर दी है।
कांग्रेस की छात्र शाखा एनएसयूआई ने कहा कि छात्रों और अभिभावकों ने परिणामों में गड़बड़ियों व तकनीकी समस्याओं की शिकायतें की हैं जबकि सीबीएसई ने भी ऐसी कुछ समस्याओं की बात स्वीकार की है।
CBSE 12th Re-evaluation: दायर याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में कहा गया है कि प्रतिवादी संख्या 2 (सीबीएसई) ने स्वयं अपने सार्वजनिक संचारों के माध्यम से स्वीकार किया था कि उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां प्राप्त करने के लिए उपलब्ध कराए गए पोर्टल में तकनीकी खामियां थीं।
साथ ही, बहुत कम समय में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए थे। याचिका के अनुसार, लगभग 1,27,146 आवेदन, जो 3,87,399 स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं से संबंधित थे, पोर्टल पर जमा किए गए थे।
इस बीच, एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने कहा कि मूल्यांकन प्रक्रिया में तकनीकी और प्रशासनिक विफलताओं के कारण छात्रों को शैक्षणिक नुकसान नहीं होना चाहिए।
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