सीजेआई के बयान का विरोध करने वाले नालसर 2026 ग्रेजुएट्स को राहत, बीसीआई ने नामांकन पर रोक का आदेश वापस लिया

Santosh Kumar | August 13, 2026 | 10:40 PM IST | 2 mins read

यह मामला तब शुरू हुआ जब नालसर के कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत को बुलाए जाने का विरोध किया।

छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियों और दीक्षांत समारोह में उनकी भागीदारी का विरोध किया था। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली: बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने आज हैदराबाद की नालसर यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के 2026 बैच के ग्रेजुएट छात्रों के वकील के तौर पर एनरोलमेंट पर लगी रोक हटा दी। इससे पहले, बीसीआई ने पूरे बैच का एनरोलमेंट रोक दिया था क्योंकि छात्रों ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणियों और दीक्षांत समारोह में उनकी भागीदारी का विरोध किया। अब, सभी छात्र अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल करा सकेंगे।

यह मामला तब शुरू हुआ जब नालसर के कुछ छात्रों ने यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के तौर पर चीफ जस्टिस सूर्य कांत को बुलाए जाने का विरोध किया। लगभग 450 छात्रों ने एक ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

बीसीआई ने पहले लगाई रोक, फिर हटाया

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा ने सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे नालसर से 2026 में लॉ की डिग्री लेने वाले किसी भी छात्र को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न करें।

इसके अलावा, यूनिवर्सिटी से 3 दिनों के भीतर एक विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी गई। बीसीआई ने कहा था कि जो छात्र सबसे ऊंचे न्यायिक पद का सम्मान नहीं करते, उन्हें वकालत के पेशे के लिए सही नहीं माना जा सकता।

हालांकि, कुछ ही घंटों बाद काउंसिल ने अपना रुख बदल लिया। नए आदेश में कहा गया कि नालसर के 2026 बैच के अधिकतर छात्र बेगुनाह हैं और किसी भी अपमानजनक अभियान में शामिल होने का उनका कोई इरादा नहीं था।

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बीसीआई ने यूनिवर्सिटी से मांगी रिपोर्ट

काउंसिल के संशोधित निर्देश में यह साफ किया गया कि सभी छात्र स्टेट बार काउंसिल में एनरोलमेंट के लिए योग्य होंगे। बीसीआई का मानना है कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने शायद अनजान छात्रों को उकसाया होगा।

फिर भी, तथ्यों की जांच जारी रहेगी और यूनिवर्सिटी से रिपोर्ट मांगी गई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के इस फैसले से नालसर ग्रेजुएट्स को बड़ी राहत मिली है। अब वे तय प्रक्रिया के तहत स्टेट बार काउंसिल्स में आवेदन कर सकेंगे।

हालांकि, बीसीआई ने कहा कि जांच के दायरे में शामिल पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ आगे भी कार्रवाई की जा सकती है। छात्रों ने सीजेआई सूर्य कांत की उस टिप्पणी का विरोध किया था जिसमें उन्होंने युवाओं की तुलना कॉकरोच से की थी।

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