हिमाचल सीएम ने यौन उत्पीड़न और रैंगिंग के चलते दलित छात्रा की मौत मामले में निष्पक्ष जांच का दिया आश्वासन
Press Trust of India | January 4, 2026 | 05:24 PM IST | 2 mins read
राज्य सरकार ने इस मामले में 3 जनवरी को धर्मशाला के सरकारी कॉलेज के सहायक प्रोफेसर (भूगोल) अशोक कुमार को निलंबित कर दिया है।
शिमला: हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकारी कॉलेज में कथित तौर पर यौन उत्पीड़न और रैगिंग का शिकार होने के बाद 26 दिसंबर को इलाज के दौरान जान गंवाने वाली 19 वर्षीय दलित छात्रा के परिवार को निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया है। जारी एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उत्पीड़न एवं अन्याय के खिलाफ राज्य सरकार के अडिग रुख पर जोर दिया तथा हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।
सुक्खू ने परिवार को आश्वासन दिया कि राज्य सरकार पारदर्शी, गहन और समयबद्ध जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने दोहराया कि सरकार उनके साथ पूरी तरह से खड़ी है और यह सुनिश्चित करेगी कि सभी दोषियों को कानून के तहत सजा मिले।
राज्य सरकार ने 3 जनवरी को धर्मशाला के सरकारी कॉलेज के सहायक प्रोफेसर (भूगोल) अशोक कुमार को इस मामले में निलंबित कर दिया। उनके खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज होने के बाद यह निर्णय लिया गया। अपनी शिकायत में छात्रा के पिता ने आरोप लगाया कि 18 सितंबर, 2025 को उनकी बेटी को तीन वरिष्ठ छात्राओं ने पीटा, जबकि कॉलेज के प्रोफेसर ने उसके साथ अश्लील हरकतें कीं।
छात्रा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया, जिसमें उसने प्रोफेसर पर मानसिक उत्पीड़न करने, अश्लील हरकतें करने और विरोध करने पर धमकी देने का आरोप लगाया। लड़की के पिता ने आरोप लगाया कि इन घटनाओं के बाद उनकी बेटी गंभीर मानसिक तनाव में चली गई, जिससे उसकी सेहत तेजी से बिगड़ने लगी और 26 दिसंबर को इलाज के दौरान उनकी बेटी की मौत हो गई।
प्रोफेसर के खिलाफ यौन उत्पीड़न के मामले के अलावा, तीन छात्राओं पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 115(2) और 3(5) के तहत जानबूझकर चोट पहुंचाने और समान मंशा के साथ-साथ हिमाचल प्रदेश शैक्षणिक संस्थान (रोकथाम) रैगिंग अधिनियम 2009 की धारा 3 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने रैगिंग रोधी हेल्पलाइन द्वारा स्वतः संज्ञान लेते हुए शिकायत दर्ज किए जाने के बाद छात्रा की मौत की जांच के लिए पांच सदस्यीय तथ्यान्वेषी समिति का गठन किया है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने 3 जनवरी को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए हिमाचल प्रदेश पुलिस से पांच दिन के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। हिमाचल प्रदेश अनुसूचित जाति आयोग और राज्य महिला आयोग ने भी कांगड़ा के पुलिस अधीक्षक से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है।
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