सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर ठगी के आरोप में तीन गिरफ्तार, आयकर विभाग का पूर्व कर्मी भी शामिल
Press Trust of India | July 9, 2026 | 09:36 PM IST | 2 mins read
पुलिस ने कहा कि गिरोह ने सिविक सेंटर में विभाग के कार्यालयों और पार्किंग क्षेत्र के अंदर फर्जी साक्षात्कार और ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए और प्रत्येक पीड़ित से एक लाख से दो लाख रुपये एकत्र किए और उनके शैक्षिक दस्तावेज लिए।
नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस ने सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों के साथ ठगी करने के आरोप में आयकर विभाग के एक पूर्व कर्मचारी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने एक बयान में कहा कि आरोपियों ने कथित तौर पर खुद को अधिकारी बताया और प्रक्रिया को वास्तविक दिखाने के लिए सिविक सेंटर में आयकर विभाग परिसर के अंदर भर्ती संबंधी फर्जी प्रक्रियाएं पूरी कीं। इस तरह उन्होंने छह से सात लोगों से लगभग 10,00,000 रुपये की धोखाधड़ी की।
अजमेरी गेट इलाके में रहने वाले एक व्यक्ति की शिकायत के बाद मध्य जिला पुलिस ने ये गिरफ्तारियां कीं। उसने आरोप लगाया था कि आयकर विभाग में बहु कार्य कर्मचारी (एमटीएस) की नौकरी दिलाने के नाम पर उससे 2 लाख रुपये से अधिक की धोखाधड़ी की गई है। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि इस बाबत 18 मई को हौज काजी थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई।
शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि दिसंबर 2025 में एक आरोपी ने खुद को आयकर विभाग का कर्मचारी बताया और उसे सरकारी नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया। एक अन्य आरोपी ने 5,000 रुपये नकद लिए, जबकि शेष 1.98 लाख रुपये की राशि 22 दिसंबर से 31 दिसंबर, 2025 के बीच गिरोह द्वारा प्रदान किए गए बैंक खाते में डिजिटल रूप से अंतरित की गई।
पुलिस अधिकारी ने कहा कि पीड़ित को भरोसा दिलाने के लिए, आरोपी ने कथित तौर पर फर्जी सत्यापन फॉर्म तैयार किए और इस साल मार्च तक उसे आश्वासन देते रहे कि भर्ती प्रक्रिया चल रही है और फिर लापता हो गए। निरंतर तकनीकी निगरानी और बैंक लेनदेन और फोन रिकॉर्ड के विश्लेषण के बाद, पुलिस ने रोहित चौहान उर्फ दीपक तिवारी (37) को 3 जुलाई को रोहिणी से गिरफ्तार किया।
इसके बाद की जांच में आयकर विभाग के पूर्व एमटीएस कर्मचारी चिराग अग्रवाल उर्फ नवीन प्रकाश (41) और तरुण गोस्वामी उर्फ गिरिराज (37) को गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने कहा कि अन्य संदिग्ध एवं पूर्व एमटीएस कर्मचारी पवन दत्त शर्मा को जांच के दौरान पाबंद किया गया। पूछताछ के दौरान, आरोपियों ने कथित तौर पर खुलासा किया कि वे सोशल मीडिया पर विज्ञापन देकर आयकर विभाग में रिक्तियों का दावा कर बेरोजगार युवाओं को निशाना बनाते थे।
पुलिस ने कहा कि गिरोह ने सिविक सेंटर में विभाग के कार्यालयों और पार्किंग क्षेत्र के अंदर फर्जी साक्षात्कार और ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किए और प्रत्येक पीड़ित से एक लाख से दो लाख रुपये एकत्र किए और उनके शैक्षिक दस्तावेज लिए। पुलिस ने कहा कि लगभग 15 वर्षों तक एमटीएस कर्मचारी के रूप में आयकर विभाग में काम कर चुका चिराग अग्रवाल पीड़ितों को परिसर के अंदर ले गया और फर्जी भर्ती प्रक्रिया को विश्वसनीयता प्रदान करने के लिए उन्हें कामकाज के विवरण के बारे में जानकारी दी।
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