दिल्ली सरकार ने स्टार्ट-अप और इनक्यूबेशन पॉलिसी को मंजूरी दी, 5 साल में 400 करोड़ से ज्यादा का होगा फंड निवेश
Press Trust of India | July 18, 2026 | 12:34 PM IST | 2 mins read
दिल्ली सरकारी स्कूलों के छात्र इन संस्थानों में इस पॉलिसी का फायदा उठा सकते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक बयान में कहा कि सफल छात्रों को आर्थिक मदद दी जाएगी।
नई दिल्ली : दिल्ली सरकार ने स्टार्ट-अप और इनक्यूबेशन पॉलिसी को मंजूरी दे दी है। इसके तहत इनोवेशन और स्वरोजगार के लिए पांच साल में 400 करोड़ रुपये से ज़्यादा का फंड निवेश किया जाएगा। इस पॉलिसी में राज्य के 11 विश्वविद्यालय, सरकार से मदद पाने वाले 13 कॉलेज, आईटीआई और सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थान शामिल होंगे।
दिल्ली सरकारी स्कूलों के छात्र इन संस्थानों में इस पॉलिसी का फायदा उठा सकते हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने एक बयान में कहा कि सफल छात्रों को आर्थिक मदद दी जाएगी। इस पॉलिसी को लागू करने की देखरेख के लिए एक पैनल, 'स्टेट इनक्यूबेशन पॉलिसी मॉनिटरिंग कमिटी' (SIPMC) बनाई जाएगी। इस कमिटी में सरकार, शिक्षण संस्थानों, इंडस्ट्री और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
दिल्ली कैबिनेट से मंजूर हुई पॉलिसी के तहत, सरकार हर साल 'दिल्ली स्टार्ट-अप यूथ फेस्टिवल' भी आयोजित करेगी। यह फेस्टिवल युवा इनोवेटर्स, शिक्षण संस्थानों, स्टार्ट-अप्स, इन्वेस्टर्स, इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और पॉलिसी बनाने वालों को एक मंच पर लाएगा।
पॉलिसी का मकसद देश के प्रमुख केंद्रों में से एक बनाना
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इस पॉलिसी का मकसद दिल्ली को इनोवेशन और एंटरप्रेन्योरशिप के मामले में देश के प्रमुख केंद्रों में से एक बनाना है। साथ ही, यह भी सुनिश्चित करना है कि युवाओं को अपने आइडिया को सफल स्टार्ट-अप्स में बदलने के लिए ज़रूरी मदद मिले।
सीएम गुप्ता ने कहा कि इस पहल का मकसद सिर्फ लोगों को स्टार्ट-अप शुरू करने में मदद करना नहीं है, बल्कि दिल्ली के युवाओं को नौकरी चाहने वालों से नौकरी देने वालों में बदलना है। सरकार योग्य संस्थानों को इनक्यूबेशन सेंटर बनाने और उन्हें मजबूत करने के लिए एक बार आर्थिक मदद देगी। सीएमओ ने बताया कि इसके अलावा, इन सेंटर्स को मेंटरिंग, नेटवर्किंग, इनोवेशन से जुड़ी गतिविधियों और स्टार्ट-अप इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए हर साल मदद मिलेगी।
इनक्यूबेशन सेंटर्स को मिलेगी आर्थिक मदद
इन इनक्यूबेशन सेंटर्स से जुड़े स्टार्ट-अप्स को उनके विकास के अलग-अलग चरणों में माइलस्टोन-आधारित आर्थिक मदद मिलेगी। इस मदद में प्रोटोटाइप डेवलपमेंट, प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट, प्रोडक्ट डेवलपमेंट, मार्केट वैलिडेशन और कमर्शियलाइज़ेशन जैसे कई चरण शामिल होंगे।
दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि हमने जो रिकॉर्ड और फाइलें देखी हैं, उनके मुताबिक पिछली AAP सरकार ने सिर्फ पब्लिसिटी की। उनकी स्कीम 2021 में शुरू हुई और 2022 में खत्म हो गई। सूद ने कहा कि इस प्रोजेक्ट के लिए कुल बजट 22 करोड़ रुपये था, जबकि इस पॉलिसी के लिए हमारा बजट 400 करोड़ रुपये है।
उन्होंने आगे कहा, "यह एक पूरी तरह से तैयार पॉलिसी है जिसका मकसद युवा सोच और उनके आइडिया को विकसित और पोषित करना है, और उन्हें भविष्य के बिज़नेस लीडर और एंटरप्रेन्योर बनने में मदद करना है।"
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि इनक्यूबेशन सेंटर्स युवा एंटरप्रेन्योर्स को आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एक्सपर्ट मेंटरिंग, लैबोरेटरी और टेस्टिंग सुविधाओं का एक्सेस और कई अन्य सेवाएं देंगे। उन्होंने कहा कि यह पॉलिसी दिल्ली में इनोवेशन के कल्चर को मजबूत करेगी, रोजगार के नए मौके पैदा करेगी, रिसर्च-आधारित इनोवेशन को बढ़ावा देगी, इंडस्ट्री और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग को गहरा करेगी और राजधानी की नॉलेज-बेस्ड इकॉनमी को तेज़ी देगी।
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