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Chhatron Ki Goonj: राहुल गांधी ने कहा- शैक्षणिक संस्थानों, परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल का कब्जा न हो

Santosh Kumar | July 17, 2026 | 10:36 PM IST | 2 mins read

राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिन माता-पिता के बच्चों ने प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या की, सरकार ने उन्हें एक संदेश या चिट्ठी तक नहीं भेजी और न ही खेद प्रकट किया।

राहुल ने कहा, "प्रश्नपत्र लीक होने पर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत दोषी ठहराकर सजा दी जानी चाहिए।" (इमेज-एक्स/@RahulGandhi)
राहुल ने कहा, "प्रश्नपत्र लीक होने पर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत दोषी ठहराकर सजा दी जानी चाहिए।" (इमेज-एक्स/@RahulGandhi)

देहरादून: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि शैक्षणिक संस्थानों और परीक्षा एजेंसियों पर किसी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए। गांधी ने भारी बारिश के बाद यहां बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम में प्रश्नपत्र लीक के मुद्दे पर छात्रों से संवाद करते हुए कहा, ''हमारे शैक्षणिक संस्थान स्वतंत्र होने चाहिए। संस्थानों पर किसी भी राजनीतिक दल या संगठन का कब्जा नहीं होना चाहिए। कुलपति किसी एक संगठन के नहीं होने चाहिए। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी के प्रभारी भी किसी एक राजनीतिक संगठन के नहीं होने चाहिए।''

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर की कोई भी परीक्षा पूरे देश में एक ही दिन आयोजित की जाती है, लेकिन तकनीक का इस्तेमाल और प्रश्नपत्रों का रैंडमाइजेशन करके परीक्षाएं एक दिन के बजाय कई दिनों में कराई जा सकती हैं।

'परीक्षा कराने का काम निजी कंपनियों का नहीं'

राहुल ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में लचीलापन होना चाहिए और तकनीक एवं यादृच्छिकीकरण के जरिये प्रश्नपत्र लीक की समस्या को दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा, ''परीक्षा आयोजित करना सरकार का काम है।"

उन्होंने कहा, "यह काम निजी कंपनियों को नहीं दिया जा सकता क्योंकि उनका उद्देश्य पैसा कमाना होता है।'' उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने पर इसके लिए जिम्मेदार लोगों को तुरंत दोषी ठहराकर सजा दी जानी चाहिए।

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Chhatron Ki Goonj: छात्रों को मुआवजा देने की मांग

राहुल गांधी ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिन माता-पिता के बच्चों ने प्रश्नपत्र लीक के कारण आत्महत्या की, सरकार ने उन्हें एक संदेश या चिट्ठी तक नहीं भेजी और न ही खेद प्रकट किया।

उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र लीक होने की स्थिति में छात्रों के हितों की रक्षा की जानी चाहिए, दोबारा परीक्षा कराई जानी चाहिए और छात्रों को मुआवजा दिया जाना चाहिए। गांधी ने कहा, ''ये हमारे सुझाव हैं, जिन्हें आसानी से लागू किया जा सकता है।"

Chhatron Ki Goonj: पिछले 10 साल में पेपर लीक के 152 मामले

राहुल ने कहा, "प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाला हर स्टूडेंट लगभग 5 साल तक रोजाना 10 घंटे पढ़ाई करता है और उनके परिवार औसतन ₹9 लाख खर्च करते हैं। इसके बावजूद, पिछले दशक में पेपर लीक के 152 मामले सामने आए।

उन्होंने आगे कहा कि सीटों और नौकरियों की खरीद-फरोख्त के आरोप भी लगे हैं, लेकिन किसी को सज़ा नहीं मिली है। इसका असर 7.5 करोड़ युवाओं के भविष्य पर पड़ा है। इसलिए, परीक्षा प्रणाली में बड़े सुधारों की जरूरत है।

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