सीजेपी के नेतृत्व में युवाओं के विरोध-प्रदर्शनों से जुड़े सवालों के तीन सेट लोकसभा में अस्वीकार किए गए
Press Trust of India | August 16, 2026 | 06:47 PM IST | 2 mins read
सीजेपी ने कहा, अगर संसद में सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार को असल में कहां जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या विरोध-प्रदर्शनों के जरिए?
नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन से जुड़े सवालों के तीन सेट संसद के हालिया मॉनसून सत्र के दौरान मंज़ूरी की शर्तों का हवाला देते हुए अस्वीकार कर दिए गए। संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने रविवार को इस फैसले की आलोचना करते हुए ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि द्रमुक के लोकसभा सदस्य मथेश्वरन वी.एस. ने केंद्रीय गृह मंत्रालय और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से सवालों के तीन सेट के जरिए जवाब मांगे थे, जिनके नोटिस संदर्भ नंबर 101799 और 101801 थे।
दास ने कहा कि इन सवालों में नीट-यूजी 2026 के लिए आवेदन शुल्क वापसी, सरकार के प्रति लोगों का बढ़ता अविश्वास, दिल्ली में सीजेपी प्रदर्शनकारियों को पीने का पानी और साफ-सफाई की सुविधा न देना, प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं के साथ सरकार का व्यवहार, छात्रों का कल्याण, पेपर लीक और शिक्षा में सुधार, तथा शांतिपूर्ण विरोध के अपने मौलिक अधिकार का इस्तेमाल करने वाले नागरिकों के साथ बर्ताव के बारे में जानकारी मांगी गई थी।
उन्होंने कहा कि “पूरी तरह से उचित सवालों” को खारिज करने के लिए “बहुत अजीब तर्क” दिए गए। दास ने कहा कि नियम 41(2) का हवाला देते हुए सवालों को नामंजूर कर दिया गया। संपर्क करने पर, मथेश्वरन ने पुष्टि की कि सवालों को नामंजूर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जानकारी लोकसभा सदस्य पोर्टल के ज़रिए मिली। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए, दास ने विरोध प्रदर्शनों से निपटने के मामले में संसद के प्रति सरकार की जवाबदेही का मुद्दा उठाया।
दास ने कहा, “अगर संसद में ये सवाल नहीं पूछे जा सकते, तो सरकार को असल में कहां जवाबदेह ठहराया जाएगा? क्या विरोध-प्रदर्शनों के जरिए? उन अहम हफ्तों में गृह मंत्री अमित शाह संसद में क्यों नहीं आए और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब क्यों नहीं दिया?”
उन्होंने कहा, “कार्यपालिका से सवाल पूछने का सांसद का अधिकार कोई प्रक्रियात्मक परेशानी नहीं है, बल्कि यह संसदीय लोकतंत्र की आत्मा है। प्रश्नकाल इसलिए होता है क्योंकि व्यापक सार्वजनिक शक्ति का इस्तेमाल करने वाले मंत्रियों को जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जवाब देना होता है। वरना, ज़ाहिर है, लोगों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।”
दास ने कहा, “आप संसद की आवाज नहीं दबा सकते और उसे अपनी अधूरी नीतियों के लिए ‘रबर-स्टाम्प’ नहीं बना सकते। आप युवाओं को नजरअंदाज नहीं कर सकते। भारत के बारे में हमारी सोच ऐसी नहीं है।” लोकसभा की वेबसाइट के अनुसार, सवालों की स्वीकार्यता नियम 41 से 44 के साथ-साथ अध्यक्ष के निर्देशों, संसदीय मिसालों और स्थापित परंपराओं से तय होती है।
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- IIM Lucknow: आईआईएम लखनऊ ने फैमिली बिजनेस में एमबीए प्रोग्राम लॉन्च किया, पहला बैच जुलाई 2027 में, फीस जानें
- IRIS 2026: 27 क्षेत्रों के 54 स्कॉलर्स को मिला फैकल्टी रिसर्च अवार्ड; आईआईटी, एम्स, आईआईएम के शोधकर्ता शामिल
- IRIS 2026: इंडिया रिसर्च एंड इम्पैक्ट समिट 1 अक्टूबर को, नीति आयोग सदस्य समेत कई दिग्गज एजुकेटर्स होंगे शामिल
- UPSC Mains Marks: केंद्रीय सूचना आयोग ने यूपीएससी मेंस के अंकों का विवरण प्रकाशित करने की सिफारिश की
- JEE Advanced: जेईई-एडवांस्ड में 3 प्रयास की मांग तेज, 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन
- NITI Aayog Report: स्कूलों में छठी कक्षा से ही रोजगारपरक कौशल पर हो ध्यान, नीति आयोग का सुझाव
- आजादी के 80वें साल में भी 'कागजी' दावों के बीच फंसी शिक्षा व्यवस्था; पेपर लीक व बजट की कमी से जूझ रहे छात्र
- Teacher Vacancy Crisis: बिहार में टीचर्स के 2.70 लाख+ पद खाली; झारखंड, एमपी समेत कई राज्यों में हजारों वैकेंसी
- NEET 2026 Paper Leak: नीट पेपर तैयार और अनुवाद का काम एक ही समूह के शिक्षकों को देने से हुई गड़बड़ी - सूत्र
- MCC NEET Counselling 2026: नीट काउंसलिंग शेड्यूल जल्द, जेपी नड्डा ने की समीक्षा, छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार