Press Trust of India | October 15, 2026 | 10:54 PM IST | 2 mins read
सीआईसी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 25(5) का हवाला देते हुए कहा कि संबद्ध स्कूलों पर निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण की सिफारिश करना उचित समझा गया।

नई दिल्ली: केंद्रीय सूचना आयोग ने डमी दाखिलों की जांच करने और अनिवार्य उपस्थिति संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों में औचक निरीक्षण की सिफारिश की है। सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने हाल ही में जारी आदेश में सीबीएसई को उससे संबद्ध स्कूलों में औचक निरीक्षण करने की सिफारिश की है, ताकि संबद्धता की शर्तों के उल्लंघन को रोका जा सके। यह सिफारिश एक शिकायत के बाद की गई, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना ही छात्रों को डमी प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे।
डमी दाखिले या डमी स्कूल वे शैक्षणिक व्यवस्थाएं होती हैं जिनमें छात्रों का नाम स्कूल के रजिस्टर में दर्ज होता है, लेकिन उन्हें नियमित रूप से स्कूल जाने या कक्षाओं में बैठने की अनिवार्यता नहीं होती।
सीआईसी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम की धारा 25(5) का हवाला देते हुए कहा कि संबद्ध स्कूलों पर निगरानी और नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए औचक निरीक्षण की सिफारिश करना उचित समझा गया।
आदेश में कहा गया, "आयोग ने कक्षाओं में उपस्थित नहीं होने वाले छात्रों को स्कूलों द्वारा डमी प्रमाणपत्र जारी किए जाने के संबंध में जानकारी मांगने वाले शिकायतकर्ता की ओर से उठाए गए मुद्दे की गंभीरता को देखते हुए सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 25(5) के तहत सीबीएसई को औचक निरीक्षण करने की शक्ति का इस्तेमाल करने की सिफारिश करना उचित समझा है।"
यह शिकायत भोपाल के निजी मिशनरी स्कूलों में उपस्थिति संबंधी अनिवार्य नियमों की जानकारी मांगने वाले एक आरटीआई आवेदक ने दर्ज कराई। आवेदक ने विषयों के चयन और निर्धारित पाठ्यपुस्तकों के संबंध में बोर्ड के नियमों की जानकारी भी मांगी।
शिकायतकर्ता ने केंद्रीय सूचना आयोग को बताया कि उसने डमी दाखिलों का खुलासा करने के लिए आरटीआई आवेदन दायर किया था। इनमें कथित तौर पर छात्र कक्षाओं में उपस्थित हुए बिना ही परीक्षा के परिणाम प्राप्त कर लेते हैं।
सीबीएसई के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने शुरुआत में आवेदन शुल्क के रूप में जमा किए गए भारतीय पोस्टल ऑर्डर में त्रुटि का हवाला देते हुए आवेदन लौटा दिया था। आवेदक से भोपाल में सीबीएसई सचिव के नाम देय वैध भुगतान माध्यम से जमा करने को कहा गया था।
सुनवाई के दौरान आयोग ने कहा कि तकनीकी आधार पर आवेदन खारिज करना सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप नहीं है। आयोग ने कहा, "तकनीकी आधार पर सूचना देने से इनकार करना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की भावना के अनुरूप नहीं है।"
उसने कहा कि केंद्रीय जन सूचना अधिकारी से प्रत्येक बिंदु पर जवाब देने में सहायता करने की अपेक्षा की जाती है। केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने माफी मांगी और जानकारी उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। इसके बाद सीबीएसई ने प्रत्येक बिंदु पर जवाब प्रस्तुत किया, जिसे रिकॉर्ड में ले लिया गया।
यह स्पेशल परीक्षा उन छात्रों के लिए है जो मार्च-अप्रैल 2026 में हुई रेगुलर बोर्ड परीक्षाओं में शामिल नहीं हो पाए थे। प्रभावित स्टूडेंट्स सीबीएसई 12वीं की विशेष परीक्षा का एडमिट कार्ड अब डाउनलोड कर सकते हैं।
Santosh Kumar