केंद्र ने आईआईटी-कानपुर में छात्रों की आत्महत्याओं की जांच के लिए 3 सदस्यीय समिति का गठन किया
Santosh Kumar | January 23, 2026 | 08:24 AM IST | 1 min read
संस्थान में हाल ही में आत्महत्या की दो घटनाएं सामने आने के बाद, संस्थान ने सभी छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य कर दिया है।
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी)-कानपुर में छात्रों द्वारा आत्महत्या करने की घटनाओं की समीक्षा करने और ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए बृहस्पतिवार को तीन सदस्यीय एक समिति का गठन किया। इस समिति को मानसिक स्वास्थ्य एवं मानसिक कल्याण सहायता को बढ़ाने के उपायों का सुझाव देने के लिए भी कहा गया है।
तीन सदस्यीय समिति की अध्यक्षता राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम (एनईटीएफ) के अध्यक्ष अनिल सहस्त्रबुद्धे, मनोचिकित्सक जितेंद्र नागपाल और केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) रीना सोनोवाल कौली करेंगे।
IIT Kanpur Suicide: 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट देनी होगी
3 सदस्यीय समिति को 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है। संस्थान में हाल ही में आत्महत्या की दो घटनाएं सामने आने के बाद, संस्थान ने सभी छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जांच कराना अनिवार्य कर दिया है।
संस्थान ने कहा कि मध्यम या गंभीर जोखिम की पहचान वाले विद्यार्थियों से प्रशिक्षित परामर्शदाताओं द्वारा संपर्क किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सकों से काउंसिलिंग कराई जाएगी जिससे शुरू से ही उचित देखभाल सुनिश्चित हो सके।
विद्यार्थियों के लिए कार्यशालाओं का आयोजन
संस्थान के पीएचडी के छात्र रामस्वरूप इशराम ने 20 जनवरी को परिसर की छठी मंजिल से कथित तौर पर कूदकर आत्महत्या कर ली। इससे पूर्व, 29 दिसंबर को बीटेक छात्र जय सिंह मीना (26) को छात्रावास के उसके कमरे में मृत पाया गया।
संस्थान विद्यार्थियों को जागरूक करने के लिए कार्यशालाओं का आयोजन कर रहा है जिसमें सुरक्षाकर्मियों, डॉक्टरों, पुस्तकालय के कर्मचारियों, हॉल प्रबंधकों, मेस की टीमों और सफाईकर्मियों को शामिल किया जा रहा है।
छात्रों में तनाव को पहचान कर उचित प्रतिक्रिया देने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। संस्थान ने 24 घंटे और सातों दिन चलनी वाली एक आपात मानसिक स्वास्थ्य सहयोग प्रणाली भी स्थापित की है।
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