Campus in SAARC Countries: सार्क देशों में खुलेंगे नए कैंपस, एसएयू अध्यक्ष बोले- सदस्य देशों से मिल रहा फंड
Press Trust of India | February 21, 2024 | 02:52 PM IST | 2 mins read
एसएयू के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों से धन आना शुरू हो गया है, एक ऐसा कदम जो विश्वविद्यालय को अपने वित्तीय संकट से उबरने में मदद करेगा।
नई दिल्ली: साउथ एशियन यूनिवर्सिटी (एसएयू) के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने बुधवार (21 फरवरी) को सार्क देशों में नए कैंपस खोलने की बात कही। अग्रवाल ने कहा कि सार्क सदस्य देशों से फंड मिल रहा है, जिससे एसएयू जल्द ही सार्क देशों में नए कैंपस खोलेगा। उन्होंने कहा कि हम इन परिसरों को चलाने के लिए पूरे भारत में इसकी शाखाएं स्थापित करने पर भी विचार कर रहे हैं।
पीटीआई से बात करते हुए, एसएयू के अध्यक्ष केके अग्रवाल ने कहा कि दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के सदस्य देशों से धन आना शुरू हो गया है, एक ऐसा कदम जो विश्वविद्यालय को अपने वित्तीय संकट से उबरने में मदद करेगा।
विश्वविद्यालय का खर्च प्राथमिकता
केके अग्रवाल ने कहा कि उनकी प्राथमिकताएं विश्वविद्यालय के खर्च को नियंत्रित करना है, जैसे छात्रवृत्ति के बिना अधिक छात्रों को आकर्षित करना और शिक्षकों के लिए उचित वेतन संरचना बनाना।
अग्रवाल ने कहा कि यह सुनिश्चित करना सभी सदस्य देशों की जिम्मेदारी है कि विश्वविद्यालयों को समय पर फंड दिया जाए। कुछ सदस्य देश काफी समय से अपना हिस्सा नहीं दे रहे थे, मैंने उन सभी से बात की है और कुल मिलाकर सभी भुगतान करने को तैयार हैं।
आपको बता दें कि SAU करीब चार साल से बिना नियमित अध्यक्ष के काम कर रहा था। यह पद पिछले साल दिसंबर में भरा गया। अग्रवाल ने कहा कि नियमित प्रबंधन की कमी के कारण विश्वविद्यालय को अत्यधिक वित्तीय बाधाओं का सामना करना पड़ा लेकिन अब हालात पहले से बेहतर हैं।
57 प्रतिशत फंड देता है भारत
आपको बता दें कि साल 2020 में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की थी। उन्होंने तब कहा था कि पाकिस्तान के साथ-साथ अन्य सभी सार्क देशों की रुचि दक्षिण एशियाई विश्वविद्यालय (एसएयू) में कम हो रही है, जिसके कारण परिसर को चलाने की जिम्मेदारी भारत पर आ गई है।
समझौते के अनुसार, आठ सदस्य देश संस्था को चलाने की आवर्ती लागत साझा करते हैं। भारत को परिचालन लागत का 57.49% वहन करना होता है। पाकिस्तान और बांग्लादेश को क्रमशः 12.98% और 8.20% बोझ साझा करना आवश्यक है। अफगानिस्तान, भूटान और मालदीव प्रत्येक को बिल का 3.83% भुगतान करना पड़ता है। जबकि श्रीलंका और नेपाल की परिचालन लागत 4.92% है।
अगली खबर
]MAH 3-year LLB CET 2024: एमएएच एलएलबी प्रवेश परीक्षा आवेदन का आज अंतिम दिन, cetcell.mahacet.org से करें अप्लाई
जो अभ्यर्थी प्रवेश परीक्षा में भाग लेना चाहते हैं, वे महाराष्ट्र स्टेट कॉमन एंट्रेंस टेस्ट सेल की आधिकारिक वेबसाइट cetcell.mahacet.org पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं।
Santosh Kumar | 2 mins readविशेष समाचार
]- JEE Advanced: जेईई-एडवांस्ड में 3 प्रयास की मांग तेज, 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन
- NITI Aayog Report: स्कूलों में छठी कक्षा से ही रोजगारपरक कौशल पर हो ध्यान, नीति आयोग का सुझाव
- आजादी के 80वें साल में भी 'कागजी' दावों के बीच फंसी शिक्षा व्यवस्था; पेपर लीक व बजट की कमी से जूझ रहे छात्र
- Teacher Vacancy Crisis: बिहार में टीचर्स के 2.70 लाख+ पद खाली; झारखंड, एमपी समेत कई राज्यों में हजारों वैकेंसी
- NEET 2026 Paper Leak: नीट पेपर तैयार और अनुवाद का काम एक ही समूह के शिक्षकों को देने से हुई गड़बड़ी - सूत्र
- MCC NEET Counselling 2026: नीट काउंसलिंग शेड्यूल जल्द, जेपी नड्डा ने की समीक्षा, छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार
- NEET Paper Leak: एक नहीं कई बार लीक हो चुका है नीट का पेपर; जानिए काला सच
- AISHE Reports: अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण रिपोर्ट वर्ष 2022-23 और 2023-24 के लिए जारी
- UDISE Report: वर्ष 2023-24 और 2025-26 के बीच सरकारी स्कूलों में दाखिले में लगभग 86 लाख की कमी आई
- NEET Retest 2026: नीट रीटेस्ट कल, सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद; गाइडलाइंस जारी, एनटीए की आज देशभर में मॉक ड्रिल