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BHU: बीएचय ने यूप्रिस बायोलॉजिकल प्राइवेट लिमिटेड के साथ साइन किया एमओयू

Saurabh Pandey | July 7, 2025 | 06:29 PM IST | 2 mins read

प्रो. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में यह उपलब्धि हासिल करने के लिए बीएचयू टीम को बधाई दी। उन्होंने आईपीआरटीटी टास्क फोर्स के प्रयासों और शोध टीम की कड़ी मेहनत की सराहना की।

प्रो. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में यह उपलब्धि हासिल करने के लिए बीएचयू टीम को बधाई दी।
प्रो. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में यह उपलब्धि हासिल करने के लिए बीएचयू टीम को बधाई दी।

नई दिल्ली : बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) ने सोमवार को मेसर्स यूप्रिस बायोलॉजिकल प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए, जिसके तहत इसके व्यावसायीकरण के लिए करक्यूमिन क्वांटम डॉट्स की तैयारी के लिए प्राप्त पेटेंट के लाइसेंसिंग अधिकारों को स्थानांतरित किया गया। यूप्रिस बायोलॉजिकल एक निजी लिमिटेड फर्म है।

इस समझौता ज्ञापन पर रजिस्ट्रार प्रो. अरुण कुमार सिंह और यूप्रिस बायोलॉजिकल के परियोजना समन्वयक अभिषेक सिंह ने हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर यूप्रिस बायोलॉजिकल के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) हिमांशु अग्रवाल ने सहमति पत्र प्राप्त किया। केंद्रीय रजिस्ट्री में हुए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान समारोह के दौरान बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण टास्क फोर्स के समन्वयक प्रो. बिरिंची कुमार शर्मा, प्रो. गीता राय, प्रो. रजनीश सिंह, डॉ. वेणुगोपाल और आईपीआरटीटी टास्क फोर्स के सदस्य भी मौजूद थे।

हल्दी में पाए जाने वाले गुण

करक्यूमिन क्वांटम डॉट्स (CurQDs) तैयार करने की यह अत्याधुनिक तकनीक CurQDs युक्त उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन में एक मील का पत्थर है। हल्दी में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक करक्यूमिन से प्राप्त CurQDs में नैनोस्केल परिशुद्धता के साथ शक्तिशाली जीवाणुरोधी, एंटीबायोफिल्म, एंटीऑक्सिडेंट गुण होते हैं।

रिसर्च में शामिल प्रोफेसर

भारत सरकार द्वारा विधिवत पेटेंट प्राप्त इस इनोवेशन को प्रो. प्रद्योत प्रकाश (माइक्रोबायोलॉजी विभाग, चिकित्सा विज्ञान संस्थान), प्रो. मोनिका बंसल (दंत विज्ञान संकाय, चिकित्सा विज्ञान संस्थान), प्रो. राकेश कुमार सिंह (जैव रसायन विभाग, विज्ञान संस्थान) और डॉ. आशीष कुमार सिंह (बायोकेमिस्ट्री विभाग, पटना विश्वविद्यालय और बीएचयू में पूर्व रिसर्च एसोसिएट) द्वारा किया गया है

करक्यूमिन के उपयोग की विधि विकसित

बीएचयू ने हल्दी में प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले करक्यूमिन के प्रभावी उपयोग के लिए एक विधि विकसित की है, जो इसकी पारंपरिक सीमाओं को पार करती है। इस इनोवेशन का उपयोग त्वचा और दंत संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए उत्पादों में किया जा सकता है।

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प्रो. संजय कुमार ने प्रौद्योगिकी हस्तांतरण में यह उपलब्धि हासिल करने के लिए बीएचयू टीम को बधाई दी। उन्होंने आईपीआरटीटी टास्क फोर्स के प्रयासों और शोध टीम की कड़ी मेहनत की सराहना की।

प्रो. बिरिंची कुमार सरमा के नेतृत्व में पुनर्गठित बौद्धिक संपदा अधिकार और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण टास्क फोर्स शोधकर्ताओं के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए सराहनीय प्रगति कर रहा है।

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