UP Police Constable Exam: यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा के पेपर का सोशल मीडिया पर एनालिसिस, चर्चा करने पर होगी जेल
Saurabh Pandey | June 3, 2026 | 08:43 PM IST | 3 mins read
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सोशल मीडिया पर परीक्षा के प्रश्न पत्रों या सामग्री की चर्चा और विश्लेषण करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। इस नियम का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड (UPPRPB) ने आगामी 'यूपी पुलिस कांस्टेबल एवं समकक्ष पदों पर होने वाली भर्ती परीक्षा 2025' को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण और सख्त चेतावनी जारी की है। बोर्ड के संज्ञान में आया है कि कुछ व्यक्ति और कंटेंट क्रिएटर्स सोशल मीडिया पर होने वाली परीक्षाओं के प्रश्न पत्रों और उनके कंटेंट पर चर्चा, विश्लेषण या शेयर कर रहे हैं। बोर्ड ने साफ किया है कि 'उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) अधिनियम, 2024' के तहत ऐसी सभी गतिविधियां पूरी तरह से प्रतिबंधित और दंडनीय हैं।
पुलिस भर्ती बोर्ड ने सख्त लहजे में सभी कंटेंट क्रिएटर्स, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और आम व्यक्तियों को चेतावनी दी है कि वे परीक्षा के प्रश्न पत्रों या उनकी किसी भी सामग्री पर किसी भी प्रकार की चर्चा, विश्लेषण या उसे शेयर न करें। यदि कोई भी व्यक्ति इन नियमों का उल्लंघन करता पाया गया, तो उसके खिलाफ नए परीक्षा कानून-2024 के तहत बेहद कठोर दंडात्मक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
जानिए किस कृत्य पर मिलेगी क्या सजा
उत्तर प्रदेश सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024 के तहत विभिन्न अपराधों के लिए तय किए गए कड़े प्रावधान इस प्रकार हैं-
- परीक्षार्थियों द्वारा नकल या अनुचित साधन (धारा-4) - यदि कोई अभ्यर्थी परीक्षा में नकल या अनुचित साधनों का प्रयोग करता है, तो उसका परिणाम रोक दिया जाएगा और उसे अगले एक कैलेंडर वर्ष के लिए परीक्षा से डिबार (प्रतिबंधित) किया जा सकता है। इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा-318(2) के तहत छल का मुकदमा चलेगा, जिसमें 3 वर्ष की जेल का प्रावधान है और यह एक गैर-जमानती (अजमानतीय) अपराध है।
- साल्वर गिरोह (Solver Gang) के लिए सबसे सख्त कानून (धारा-11) - परीक्षा केंद्र पर साल्वर बैठाने, परीक्षा से पहले प्रश्न पत्र पास रखने, लीक करने या हल करने जैसी गतिविधियों पर न्यूनतम 7 वर्ष से लेकर अधिकतम 14 वर्ष तक की सजा और 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का जुर्माना हो सकता है।
- अपराध दोहराने और जान का खतरा पैदा करने पर आजीवन कारावास - यदि साल्वर गिरोह द्वारा अपराध दोबारा किया जाता है, या साल्वर गिरोह से मिलीभगत करके परीक्षा कार्य में लगे किसी व्यक्ति की जान को खतरा पहुंचाकर परीक्षा प्रभावित की जाती है, तो आजीवन कारावास और 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक के भारी जुर्माने का प्रावधान है।
- ड्यूटी पर तैनात कर्मियों या संस्थाओं द्वारा लापरवाही (धारा-5, 6 व 8) - परीक्षा संपन्न कराने में लगे अधिकारी, कर्मचारी या कार्यदायी संस्था का प्रबंधन यदि किसी भी तरह की जानकारी लीक करता है या अनुचित लाभ पहुंचाता है, तो उन्हें 2 से 10 वर्ष तक की जेल और 2 से 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भुगतना होगा।
- मूल्यांकन में हेराफेरी या कर्तव्य में लापरवाही (धारा-12 व 14)- कॉपियों या रिकॉर्ड के मूल्यांकन में प्रत्यक्ष/अप्रत्यक्ष हेराफेरी करने या जानबूझकर ड्यूटी में लापरवाही बरतने पर (जिससे पेपर लीक की संभावना बने) 2 से 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
सभी अपराध होंगे गैर-जमानती, संपत्ति भी होगी कुर्क
अपर सचिव (भर्ती) एवं परीक्षा नियंत्रक सत्यार्थ अनिरूद्ध पंकज द्वारा जारी इस आदेश में स्पष्ट किया गया है कि इस अधिनियम के तहत आने वाले सभी अपराध संज्ञेय, गैर-जमानती और अशमनीय (Non-Compoundable) होंगे। इन मामलों की जांच पुलिस उपाधीक्षक या सहायक पुलिस आयुक्त स्तर के अधिकारी करेंगे और इनका ट्रायल सत्र न्यायालय में चलेगा। इसके अलावा, साल्वर गिरोह के सदस्यों की सम्पत्ति की कुर्की एवं अधिहरण (जब्ती) की कार्रवाई जिला मजिस्ट्रेट (DM) के स्तर से की जाएगी।
बोर्ड ने की सुचिता बनाए रखने की अपील
उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड ने सभी अभ्यर्थियों और हितधारकों से यह विशेष निवेदन किया है कि वे परीक्षाओं की शुचिता और पवित्रता बनाए रखने में सरकार का सहयोग करें । बोर्ड ने अभ्यर्थियों को आगाह किया है कि वे सोशल मीडिया पर चल रहे किसी भी प्रकार के भ्रामक विश्लेषणों, चर्चाओं या प्रतिबंधित सामग्रियों का हिस्सा न बनें और न ही उन्हें बढ़ावा दें ।
अगली खबर
]विशेष समाचार
]- IIM Lucknow: आईआईएम लखनऊ ने फैमिली बिजनेस में एमबीए प्रोग्राम लॉन्च किया, पहला बैच जुलाई 2027 में, फीस जानें
- IRIS 2026: 27 क्षेत्रों के 54 स्कॉलर्स को मिला फैकल्टी रिसर्च अवार्ड; आईआईटी, एम्स, आईआईएम के शोधकर्ता शामिल
- IRIS 2026: इंडिया रिसर्च एंड इम्पैक्ट समिट 1 अक्टूबर को, नीति आयोग सदस्य समेत कई दिग्गज एजुकेटर्स होंगे शामिल
- UPSC Mains Marks: केंद्रीय सूचना आयोग ने यूपीएससी मेंस के अंकों का विवरण प्रकाशित करने की सिफारिश की
- JEE Advanced: जेईई-एडवांस्ड में 3 प्रयास की मांग तेज, 12,000 से अधिक अभ्यर्थियों ने मंत्रालय को दिया प्रतिवेदन
- NITI Aayog Report: स्कूलों में छठी कक्षा से ही रोजगारपरक कौशल पर हो ध्यान, नीति आयोग का सुझाव
- आजादी के 80वें साल में भी 'कागजी' दावों के बीच फंसी शिक्षा व्यवस्था; पेपर लीक व बजट की कमी से जूझ रहे छात्र
- Teacher Vacancy Crisis: बिहार में टीचर्स के 2.70 लाख+ पद खाली; झारखंड, एमपी समेत कई राज्यों में हजारों वैकेंसी
- NEET 2026 Paper Leak: नीट पेपर तैयार और अनुवाद का काम एक ही समूह के शिक्षकों को देने से हुई गड़बड़ी - सूत्र
- MCC NEET Counselling 2026: नीट काउंसलिंग शेड्यूल जल्द, जेपी नड्डा ने की समीक्षा, छात्र-केंद्रित कई बड़े सुधार