UP Madrasa: मदरसों की एटीएस जांच के मामले में हस्तक्षेप करने से इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किया इनकार, याचिका खारिज

Press Trust of India | July 4, 2026 | 08:34 AM IST | 2 mins read

मदरसों के खिलाफ यह जांच खुफिया सूचनाओं के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें विदेशी चंदा प्राप्त होने के आरोप लगाए गए थे।

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जांच समिति के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट)

नई दिल्ली: इलाहाबाद उच्च न्यायालय (Allahabad High Court) ने उत्तर प्रदेश में संचालित 4,000 से अधिक गैर सहायता प्राप्त मदरसों के वित्तपोषण की आतंकवाद निरोधक दस्ता (ATS) द्वारा की जा रही जांच के मामले में हस्तक्षेप करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति विवेक शरण की खंडपीठ ने मदरसा प्रबंधन समिति और टीचर्स एसोसिएशन, मदरसा अरबिया की ओर से दायर याचिका खारिज कर दी।

याचिकाकर्ताओं ने अदालत से 9 दिसंबर, 2025 के आदेश को रद्द करने की मांग की थी, जिसके तहत उत्तर प्रदेश सरकार ने एटीएस के माध्यम से उनके संस्थानों के वित्तपोषण की जांच शुरू की थी। याचिकाकर्ताओं ने अदालत में कहा कि इससे पहले भी लगभग इसी आधार पर दो जांच बार की जा चुकी हैं, जिनमें उनके खिलाफ कुछ भी प्रतिकूल नहीं मिला था।

उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा जांच याचिकाकर्ताओं को परेशान करने की एक कोशिश मात्र है, इसलिए यह जांच गलत है और इसपर रोक लगनी चाहिए। वहीं, अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने अदालत को बताया कि विभिन्न स्रोतों से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर यह जांच केवल याचिकाकर्ताओं के खिलाफ नहीं, बल्कि राज्य के 4,000 संस्थानों के खिलाफ की जा रही है।

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गोयल ने कहा कि जांच कोई दंडात्मक या जबरन की जाने वाली कार्रवाई नहीं है और याचिकाकर्ताओं को अपना जवाब प्रस्तुत करने की पूरी स्वतंत्रता है। राज्य सरकार के पक्ष पर विचार करते हुए खंडपीठ ने याचिका खारिज कर दी और कहा, “मामले के तथ्यों को देखते हुए अदालत का स्पष्ट मत है कि जांच को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जबरन की जाने वाली कार्रवाई नहीं कहा जा सकता। इसलिए अदालत फिलहाल याचिका पर विचार करने की इच्छुक नहीं है।”

हालांकि, अदालत ने यह स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता जांच समिति के समक्ष अपना जवाब प्रस्तुत करने के लिए स्वतंत्र हैं और यदि कोई जवाब दाखिल किया जाता है, तो उस पर विचार किया जाएगा। मदरसों के खिलाफ यह जांच खुफिया सूचनाओं के आधार पर शुरू की गई थी, जिनमें विदेशी चंदा प्राप्त होने के आरोप लगाए गए थे। इन सूचनाओं में बिना वित्तीय दस्तावेजों या आय के सत्यापित स्रोतों के विभिन्न स्थानों पर बड़े पैमाने पर संस्थानों के निर्माण का उल्लेख किया गया था।

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