UP Board: यूपी बोर्ड ने प्रदेश के 465 सेल्फ फाइनेंस स्कूलों की मान्यता स्वतः की रद्द, जानें वजह?
Saurabh Pandey | June 19, 2026 | 07:40 AM IST | 2 mins read
यूपी बोर्ड ने पिछले दो सत्रों से बंद पड़े और परीक्षा में एक भी छात्र न भेजने वाले प्रदेश के 465 वित्तविहीन स्कूलों की मान्यता स्वतः ही रद्द कर दी है।
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने राज्य में शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाया है। बोर्ड ने प्रदेश भर के 465 सेल्फ-फाइनेंस (वित्तविहीन) स्कूलों की मान्यता को तत्काल प्रभाव से स्वतः ही रद्द कर दिया है। यह सख्त फैसला तब लिया गया जब यह जानकारी सामने आई कि इन स्कूलों ने लगातार दो शैक्षणिक सत्रों (2024-25 और 2025-26) में न तो बोर्ड परीक्षाओं के लिए किसी छात्र को भेजा और न ही वहां कोई शैक्षणिक कक्षाएं संचालित की गईं।
मान्यता गंवाने वाले स्कूलों में सबसे बड़ी संख्या प्रयागराज मंडल की है, जहां 150 स्कूलों पर कार्रवाई की गई है। इसके बाद वाराणसी मंडल के 142 स्कूलों की मान्यता रद्द हुई है। इसके अतिरिक्त, मेरठ के 102 स्कूल, बरेली के 34 और गोरखपुर के 37 स्कूलों की मान्यता को भी यूपी बोर्ड द्वारा निरस्त कर दिया गया है।
जांच में पाया गया कि ये सभी संस्थान पूरी तरह से निष्क्रिय (नॉन-फंक्शनल) थे और बोर्ड की शैक्षणिक आवश्यकताओं और मानदंडों को पूरा करने में पूरी तरह विफल रहे। जनता की जानकारी और आवश्यक कार्रवाई के लिए बोर्ड ने इन प्रभावित 465 संस्थानों की सूची भी जारी कर दी है।
कार्रवाई के दायरे में आए हाईस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज
मान्यता खोने वाले कुल संस्थानों में से 306 हाईस्कूल स्तर के हैं, जिनमें 53 बालिकाओं के स्कूल और 253 को-एड (सह-शिक्षा) स्कूल शामिल हैं। बाकी बचे 159 संस्थान इंटरमीडिएट कॉलेज हैं, जिनमें 41 बालिका संस्थान और 118 को-एड कॉलेज शामिल हैं। इन आंकड़ों से साफ है कि मान्यता गंवाने वाले संस्थानों में सह-शिक्षा (को-एड) देने वाले स्कूलों की संख्या सबसे अधिक है।
किस नियम के तहत हुई यह कार्रवाई
यूपी बोर्ड द्वारा यह प्रशासनिक कार्रवाई 'इंटरमीडिएट शिक्षा अधिनियम, 1921' के तहत बोर्ड विनियमों के अध्याय VII के अनुसार की गई है। इस अधिनियम के विनियम 11(डी) के अनुसार, यदि यह पाया जाता है कि किसी नवनिर्वाचित हाईस्कूल या इंटरमीडिएट स्तर के संस्थान से लगातार दो वर्षों तक कोई भी छात्र बोर्ड परीक्षा में शामिल नहीं हुआ है या वहां शैक्षणिक कक्षाएं नहीं चलाई गई हैं, तो उसकी मान्यता स्वतः ही समाप्त हो जाती है।
बोर्ड सचिव का बयान
यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने इस मामले पर स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि इस नियम का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वही संस्थान मान्यता प्राप्त रखें जो वास्तव में सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। उन्होंने यह भी साफ किया कि यह प्रावधान पहले से मान्यता प्राप्त संस्थानों से जुड़ी इंटरमीडिएट की एकमुश्त कक्षाओं, अतिरिक्त कक्षाओं या वैकल्पिक विषयों पर लागू नहीं होता है। पिछले दो शैक्षणिक सत्रों के रिकॉर्ड और परीक्षा डेटा की गहन समीक्षा के बाद ही बोर्ड इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि ये 465 संस्थान बोर्ड की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा नहीं कर रहे थे, जिसके चलते यह कार्रवाई की गई है।
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