मध्य प्रदेश में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग कोर्स अब हिंदी में, फाइनल ईयर छात्रों को 2 लाख की प्रोत्साहन राशि
Press Trust of India | September 5, 2026 | 11:50 AM IST | 2 mins read
मध्य प्रदेश के एसजीएसआईटीएस, इंदौर में हिंदी माध्यम से बीटेक सिविल इंजीनियरिंग की शुरुआत की गई है, जहां 30 सीटों का विशेष बैच तैयार किया गया है। इस बैच के छात्रों को अंतिम वर्ष में राज्य सरकार की ओर से 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी।
नई दिल्ली : मध्य प्रदेश में मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ी शुरुआत की गई है। इंदौर के 'श्री जीएस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस' (SGSITS) में इसी शैक्षणिक सत्र से हिंदी माध्यम में बीटेक सिविल इंजीनियरिंग का कोर्स शुरू किया गया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के तहत शुरू किए गए 30 सीटों के इस विशेष बैच में दाखिला लेने वाले छात्रों को राज्य सरकार की ओर से अंतिम वर्ष में 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जाएगी। जानकारी के अनुसार, अब तक लगभग 20 छात्र इसमें प्रवेश ले चुके हैं।
यह पहल उन छात्रों के लिए बेहद मददगार साबित होगी जो 12वीं तक हिंदी माध्यम से पढ़ने के बाद अंग्रेजी की वजह से इंजीनियरिंग की पढ़ाई में पिछड़ जाते थे या बीच में ही कॉलेज छोड़ देते थे। एसजीएसआईटीएस के सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अध्यक्ष सुनील अजमेरा ने बताया कि छात्र अब अपनी मातृभाषा में आसानी से पढ़ाई करने के साथ-साथ परीक्षा भी दे सकेंगे।
4 साल की मेहनत के बाद तैयार किया गया कोर्स
संस्थान ने इस कोर्स के लिए पिछले चार वर्षों से गहन तैयारी की है। सिविल विभाग के सहायक प्रोफेसर विवेक तिवारी के मुताबिक, विशेषज्ञों की टीम पिछले चार सालों से अंग्रेजी के तकनीकी स्टडी मटीरियल का हिंदी में अनुवाद कर रही थी और शिक्षकों को हिंदी में पढ़ाने के लिए स्पेशल वर्कशॉप भी आयोजित की गईं।
कोर्स में प्रवेश लेने वाले छात्र रोहित शर्मा का कहना है कि अंग्रेजी में पढ़ने पर कठिन विषय समझने के लिए गूगल और ChatGPT का सहारा लेना पड़ता, लेकिन हिंदी में शिक्षक तकनीकी शब्दों को भी बहुत आसानी से समझा देते हैं। वहीं कॉलेज फैकल्टी ने स्पष्ट किया कि छात्रों को अंग्रेजी से दूर करना मकसद नहीं है, इसलिए उनके करियर को ध्यान में रखते हुए उन्हें जरूरी इंग्लिश स्किल्स भी साथ-साथ सिखाए जा रहे हैं।
छात्रों को अंग्रेजी से दूर करना उद्देश्य नहीं
संस्थान के संकाय सदस्यों ने बताया कि हिंदी माध्यम के पाठ्यक्रम में नामांकित छात्रों को आवश्यक अंग्रेजी भाषा कौशल भी सिखाया जा रहा है ताकि वे वर्तमान माहौल में प्रतिस्पर्धी बने रहें। उन्होंने कहा कि हिंदी में सिविल इंजीनियरिंग शुरू करने का उद्देश्य छात्रों को अंग्रेजी से दूर करना नहीं है, बल्कि उन्हें उनकी मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा प्रदान करना है और साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि वे अपने करियर के लिए जरूरी अंग्रेजी कौशल भी सीखें।
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