Press Trust of India | March 17, 2026 | 02:20 PM IST | 1 min read
जावेद अली खान ने कहा कि छात्र राजनीति को लोकतंत्र की नर्सरी और छात्र संघों को संसदीय प्रणाली की प्राथमिक इकाई कहा जाता था लेकिन आज छात्र संघों के चुनाव नहीं हो रहे हैं।

नई दिल्ली: देश के विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनाव कराने की मांग करते हुए राज्यसभा में मंगलवार को समाजवादी पार्टी के जावेद अली खान ने कहा कि छात्र संघ की राजनीति से निकले छात्र नेता बाद में राजनीति में आते हैं और बेहद परिपक्व माने जाते हैं। शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए खान ने कहा कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के आह्वान पर छात्रों ने संपूर्ण क्रांति आंदोलन में बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया और आजाद हिन्दुस्तान में यह आंदोलन पहले राजनीतिक बदलाव का आधार बना।
देश की आजादी के आंदोलन में भी छात्रों की अहम भूमिका थी। उन्होंने कहा कि छात्र राजनीति को लोकतंत्र की नर्सरी और छात्र संघों को संसदीय प्रणाली की प्राथमिक इकाई कहा जाता था लेकिन आज छात्र संघों के चुनाव नहीं हो रहे हैं।
जावेद अली खान ने कहा ''जब मैं पढ़ता था तब ज्यादातर विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनाव होते थे। यह कहना अधिक बेहतर होगा कि पहले छात्र संघ के चुनाव नियमित होते थे। पहले विश्वविद्यालयों की संख्या भी कम थी।"
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"आज देश में 1 हजार से अधिक विश्वविद्यालय हैं लेकिन छात्र संघ के चुनाव केवल 10-15 विश्वविद्यालयों में ही होते हैं।'' उन्होंने कहा कि छात्र संघ के चुनाव से निकले छात्र नेता बेहद परिपक्व माने जाते हैं लेकिन आज यह नर्सरी बंद हो गई है।
खान ने कहा कि आज छात्र संघ की राजनीति से निकलने वाले नेता नहीं हैं। राजनीति में बाहुबल, धन बल का प्रभाव है और पूर्व नौकरशाहों की ''लेटरल एंट्री'' हो रही है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में छात्र संघ के चुनाव नियमित रूप से कराने की मांग की।