राजस्थान में 7,000+ कम नामांकन वाले स्कूलों को मर्ज करने की तैयारी, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने जताया विरोध
Santosh Kumar | March 20, 2026 | 10:28 AM IST | 3 mins read
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने लिखा, "भाजपा एक तरफ एनईपी 2020 का ढोंग रचती है, दूसरी ओर स्कूलों पर ताले लगाकर बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीन रही है।"
नई दिल्ली: राजस्थान सरकार ने अपने शिक्षा विभाग के माध्यम से, पूरे राज्य में उन सरकारी स्कूलों के बड़े पैमाने पर विलय की तैयारियां शुरू कर दी हैं, जिनमें छात्रों का नामांकन कम है। रिपोर्टों के अनुसार, 7,000 से अधिक प्राथमिक और उच्च-माध्यमिक स्कूलों को इस पहल के दायरे में लाया जा रहा है। विशेष रूप से वे स्कूल, जिनमें प्राथमिक स्तर पर 15 से कम और उच्च स्तर पर 25 से कम छात्र हैं। दूसरी ओर, यह चिंता भी जताई जा रही है कि इस कदम का ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा तक पहुंच पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
शिक्षा विभाग ने नोटिस जारी करते हुए राज्य के उन प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में जानकारी मांगी है, जिनमें 0 से 14 छात्रों का नामांकन है, और उन उच्च प्राथमिक विद्यालयों के संबंध में जानकारी मांगी है, जिनमें 0 से 24 छात्रों का नामांकन है।
राज्य में कम नामांकन वाले 7,352 स्कूल
राज्य में ऐसे प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों की संख्या 7,352 बताई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक विभाग ने उन अंग्रेजी माध्यम के स्कूलों की संख्या के संबंध में भी जानकारी मांगी है, जहां कक्षा 9 से 12 तक में नामांकन शून्य है।
शिक्षा विभाग ने उन अंग्रेजी-माध्यम महात्मा गांधी स्कूलों की संख्या के संबंध में भी डेटा मांगा है, जहां नामांकन 30 से कम है। इन स्कूलों को पास के स्कूलों के साथ मिलाया जा सकता है। इस बीच, सरकार के इस फैसले का विरोध भी हो रहा है।
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष का फैसले पर विरोध
राजस्थान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 'एक्स' हैंडल पर लिखा कि भाजपा नीत सरकार प्रदेश के 7,000 से अधिक स्कूलों को बंद करने और उनका विलय करने की तैयारी कर रही है, जो अत्यंत चिंताजनक और दुर्भाग्यपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि यह फैसला शिक्षा का अधिकार अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन करता है, जिसके तहत कक्षा 1 से 5 के लिए 1 किलोमीटर और कक्षा 6 से 8 के लिए 3 किलोमीटर की दूरी के भीतर स्कूल का होना अनिवार्य है।
उन्होंने कहा कि स्कूलों को बंद करना और रोजगार खत्म करना बीजेपी की नीति बन गई है। 2013 से 2018 तक पूर्ववर्ती भाजपा सरकार ने भी मर्ज के नाम पर 20,000 से अधिक स्कूलें बंद किए थे, फिर वही तैयारियां चल रही हैं।
पिछले 4 साल से स्कूलों का नामांकन घटा
अध्यक्ष ने लिखा, "भाजपा एक तरफ एनईपी 2020 का ढोंग रचती है, दूसरी ओर स्कूलों पर ताले लगाकर बच्चों से शिक्षा का अधिकार छीन रही है। ये कदम 20,000 से अधिक पद समाप्त कर रोजगार की संभावनाएं खत्म करने वाला होगा।"
उन्होंने लिखा, "प्रदेश में शून्य नामांकन वाले सिर्फ 96 स्कूलें हैं, पिछले 4 साल से स्कूलों का नामांकन लगातार घटता रहा है। कांग्रेस सरकार में 2021-22 में नामांकन 97 लाख से अधिक था, वो अब 2025-26 में घटकर 73 लाख रह गया है।"
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दिसंबर 2025 में 97 स्कूलों को किया था मर्ज
अपने पोस्ट में अध्यक्ष ने लिखा, "दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज प्रदेश में एक ऐसा शिक्षा मंत्री है, जिसका शिक्षा से कोई लेना-देना नहीं है। सार्वजनिक शिक्षा को मजबूत करने के बजाय, वह इसे बर्बाद करने और गरीबों के बच्चों की शिक्षा छीनने में लगे हैं।"
बता दें कि दिसंबर 2025 में मदन दिलावर ने शून्य नामांकन वाले 97 स्कूलों को पास के स्कूलों में मिलाने की घोषणा की थी। इनमें 9 उच्च प्राथमिक और 88 प्राथमिक स्कूल शामिल थे, जिनके शिक्षकों को अन्य स्कूलों में समायोजित किया जाना था।
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