Abhay Pratap Singh | May 15, 2026 | 04:24 PM IST | 2 mins read
आईआईएम के अध्यक्षों, निदेशकों और वरिष्ठ अधिकारियों ने आईआईएम के बीच समन्वय को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने में उनकी भूमिका को बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की।

नई दिल्ली: शिक्षा मंत्रालय (MoE) के उच्च शिक्षा विभाग ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट अहमदाबाद (IIM Ahmedabad) के सहयोग से 14 मई को आईआईएम अहमदाबाद परिसर में भारतीय प्रबंधन संस्थानों (IIMs) के समन्वय मंच की बैठक आयोजित की। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने की।
बैठक में विकसित भारत के लक्ष्यों में आईआईएम की भूमिका, एमबीए प्रवेश के लिए एसओपी, छात्रों के अंतर-आईआईएम स्थानांतरण, शुल्क वापसी नीति और प्रवेश परीक्षाओं को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप बनाने पर चर्चा हुई। साथ ही युवा संकाय, प्रतिनियुक्ति नीति और आरक्षण रोस्टर जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि बैठक में छात्र कल्याण, संस्थागत समन्वय, अकादमिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर चर्चा करते हुए विकसित भारत 2047 के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर विचार किया गया। आईआईएम अब राष्ट्र निर्माण और आर्थिक बदवाल के मजबूत माध्यम बनने के साथ ही नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा में वैश्विक स्तर पर उत्कृष्टता के उदाहरण भी बन चुके हैं।
धर्मेंद्र प्रधान ने आगे कहा कि नवाचार आधारित इकोसिस्टम को बढ़ावा देकर, उभरती वैश्विक चुनौतियों के अनुरूप स्वयं को तैयार करके और मूल्य-आधारित शिक्षा को प्रोत्साहित करके आईआईएम राष्ट्रीय संपदा के रूप में विकसित हो सकते हैं। ये संस्थान भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में अहम योगदान देने के साथ वैश्विक मंच पर देश की आवाज को भी मजबूत कर रहे हैं।
उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने आईआईएम के बीच सहयोग बढ़ाने और संस्थागत समन्वय को मजबूत करने में समन्वय मंच की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस तरह के मंच विभिन्न आईआईएम के बीच बेहतर संवाद, साझेदारी और साझा विकास को बढ़ावा देने में सहायक साबित होंगे।
आईआईएम समन्वय मंच की बैठक में आईआईएम के संचालक मंडलों के अध्यक्ष, विभिन्न आईआईएम के निदेशक तथा उच्च शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ गुजरात और उत्तर प्रदेश सरकार के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान साझा हितों के मुद्दों पर चर्चा करते हुए आईआईएम संस्थानों के बीच सहयोग को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श किया गया।