NCERT: कक्षा 8 की नई सामाजिक विज्ञान किताब जारी, सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद किया गया संशोधन
Saurabh Pandey | July 7, 2026 | 06:54 PM IST | 2 mins read
एनसीईआरटी ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में बदलाव कर न्यायपालिका अध्याय से भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों के संदर्भ हटा दिए हैं।
नई दिल्ली : नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट के एक निर्देश का पालन करते हुए कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है। इस नए संस्करण में न्यायपालिका से जुड़े अध्याय में बड़े बदलाव किए गए हैं। एनसीईआरटी ने चैप्टर के कई हिस्सों को पूरी तरह से दोबारा लिखा है और पुरानी किताब के कई महत्वपूर्ण खंडों को हटा दिया है। यह संशोधित पाठ्यपुस्तक इसी चालू शैक्षणिक सत्र से छात्रों को पढ़ाई जाएगी।
संशोधित अध्याय में से न्यायपालिका के भीतर भ्रष्टाचार, अदालतों में लंबित मामलों की समस्या और सुप्रीम कोर्ट के कुछ हाई-प्रोफाइल फैसलों के संदर्भों को पूरी तरह से हटा दिया गया है। इसकी जगह अब नए अध्याय में सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक भूमिका और कानून के शासन को बनाए रखने में उसके कार्यों पर अधिक जोर दिया गया है।
इसके अलावा, आम जनता के लिए न्याय सुलभ बनाने में जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल (न्यायाधिकरण) और वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र (ADR) जैसी व्यवस्थाओं की भूमिका को प्रमुखता से शामिल किया गया है
चैप्टर की शुरुआत में भी बदलाव
यह बदलाव अध्याय की शुरुआत में पूछे जाने वाले परिचयात्मक प्रश्नों में भी दिखाई देता है। जहां पिछला संस्करण छात्रों को 'न्यायपालिका की स्वतंत्रता' के महत्व पर सोचने के लिए प्रेरित करता था, वहीं अब नई पाठ्यपुस्तक की शुरुआत एक निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण में न्याय की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करने के साथ होती है। एनसीईआरटी के अनुसार, ये सभी बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों के आधार पर किए गए हैं। समिति ने गहन समीक्षा के बाद ही इन बदलावों को मंजूरी दी है।
NEP 2020 के तहत हो रहा है सुधार
एनसीईआरटी द्वारा पाठ्यपुस्तकों में किया जा रहा यह सुधार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क (NCF) 2023 को लागू करने की प्रक्रिया का एक हिस्सा है, जिसके तहत पिछले एक साल में विभिन्न कक्षाओं के लिए कई नए संस्करण जारी किए जा चुके हैं। हालांकि, किताबों में संशोधन का यह मामला अभी भी सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है। इस मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई 2026 को होनी तय हुई है, जिसमें अदालत अपने निर्देशों के पालन की प्रगति की समीक्षा करेगी।
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कवर पेज पर सुप्रीम कोर्ट को मिली सबसे प्रमुख जगह
पुरानी किताब के कवर पेज पर देश की संसद, सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय स्मारकों, स्वतंत्रता सेनानियों और आधुनिक भारत के प्रतीकों को लगभग एक समान दृश्य महत्व दिया गया था। लेकिन संशोधित कवर पेज पर अब सुप्रीम कोर्ट की तस्वीर को सबसे ऊपर और सबसे बड़ा स्थान दिया गया है, जिससे यह मुख्य आकर्षण बन गया है। वहीं, दूसरी तरफ भारतीय संसद की तस्वीर को डिजाइन में सबसे नीचे स्थानांतरित कर दिया गया है।
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