NCERT Books Class 9: एनसीईआरटी की कक्षा 9 की समाज विज्ञान किताब में एसआईआर को किया गया शामिल

Press Trust of India | June 26, 2026 | 05:47 PM IST | 3 mins read

एसआईआर के जरिए, यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी योग्य नागरिक छूट न जाए और कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।

‘समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे’ शीर्षक से पुस्तक प्रकाशित की गई है। (प्रतीकात्मक-फ्रीपिक)

नई दिल्ली: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) की कक्षा 9 की समाज विज्ञान की किताब में निर्वाचन आयोग द्वारा कराया गया मतदाता सूची का 'विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बारे में पढ़ाया जाएगा। एनसीईआरटी के मुताबिक इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी योग्य नागरिक मतदाता सूची से न छूटे और कोई भी अयोग्य व्यक्ति इसमें शामिल न हो। 9वीं कक्षा की नई किताब में भारत के निर्वाचन आयोग की तारीफ की गई है कि उसने फर्जी खबरों, गलत जानकारी और डराने-धमकाने जैसी चुनौतियों के बावजूद निष्पक्ष चुनाव कराए।

एसआईआर प्रक्रिया के तहत अबतक मतदाता सूची से करीब 6 करोड़ नाम हटाए जा चुके हैं। इस प्रक्रिया को लेकर विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा है। आयोग ने बिहार से इस प्रक्रिया की शुरुआत की थी और यह 19 राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों में अब भी जारी है। आयोग न बिहार विधानसभ चुनाव से पहले प्रायोगिक तौर पर राज्य में 24 जून 2025 में एसआईआर की प्रक्रिया शुरू की थी और इसके तहत करीब 65 लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए।

विपक्ष और कार्यकर्ताओं का आरोप था कि निर्वाचन आयोग सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के निर्देश पर काम कर रहा है ताकि दस्तावेज न होने की वजह से नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित किया जा सके।

‘समाज का अध्ययन : भारत और उसके आगे’ शीर्षक से प्रकाशित पुस्तक में लिखा गया है, “निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण भी आयोजित करता है, जिसमें मतदाता सूची को अद्यतन, सत्यापन और सही करना शामिल है। एसआईआर के जरिए, यह सुनिश्चित किया जाता है कि कोई भी योग्य नागरिक छूट न जाए और कोई भी अयोग्य व्यक्ति मतदाता सूची में शामिल न हो।”

Also read NCERT: एनसीईआरटी ने बदला 9वीं का सिलेबस; इतिहास के 'काले दौर' के रूप में शामिल हुआ आपातकाल का चैप्टर

पाठ में लिखा गया है, “इस कवायद से यह सुनिश्चित होता है कि सभी मतदाता , विशेषकर वे युवा मतदाता जो अभी-अभी 18 साल के हुए हैं और जागरूकता की कमी या किसी अन्य कारण से छूट सकते हैं, उन्हें शामिल किया जाए।” अध्याय में बताया गया है कि एसआईआर मतदाता के नाम मौत, घर बदलने, एक ही व्यक्ति के दो बार नाम दर्ज होने और स्थायी रूप से संपर्क नहीं होने पर हटाए जाते हैं।

कक्षा 9वीं की पुरानी पाठ्यपुस्तक में चुनावी राजनीति वाले अध्याय में मतदाता सूची के बारे में एक हिस्सा था, जिसमें बताया गया था कि “हर पांच साल में सूची को पूरी तरह से पुनरीक्षण किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि यह हमेशा अद्यतन रहे।” नए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचे के अनुसार संशोधित पाठ्यपुस्तक में भारत की चुनावी प्रक्रिया के पैमाने और पूरे देश में चुनाव कराने में निर्वाचन आयोग की भूमिका पर भी प्रकाश डाला गया है।

इस चैप्टर में कहा गया है कि भारत की चुनावी प्रक्रिया बेमिसाल है और दुनिया के दूसरे हिस्सों से अलग है, क्योंकि यहां अलग-अलग इलाकों और भौगोलिक स्थितियों में 96.8 करोड़ से ज्यादा मतदाता हैं। इसमें कहा गया है कि निर्वाचन आयोग इस बड़े काम को स्वतंत्र रूप से संभालता है और यह सुनिश्चित करने के लिए काम करता है कि देश भर में चुनाव स्वतंत्र और निष्पक्ष तरीके से हों।

MakeCAREERS360
My Trusted Source
Add as a preferred source on google
[

विशेष समाचार

]
[

नवीनतम शिक्षा समाचार

]