आईआईटी, एम्स जोधपुर के शोधकर्ताओं ने बच्चों में कुपोषण की पहचान के लिए विकसित किया एआई फ्रेमवर्क
Saurabh Pandey | September 24, 2025 | 03:26 PM IST | 1 min read
ओपन-एक्सेस जर्नल MICCAI में प्रकाशित यह नई विधि, वैश्विक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक, बाल कुपोषण के सटीक और मापनीय आंकलन पर केंद्रित है।
नई दिल्ली : भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) और अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), जोधपुर के शोधकर्ताओं की टीम ने डोमेनएडेप्ट नामक एक एआई-संचालित फ्रेमवर्क विकसित किया है जो तस्वीरों का उपयोग करके बच्चों में कुपोषण का पता लगाता है। एंथ्रोविजन डेटासेट के साथ मिलकर, यह बच्चों में बौनेपन, कमजोरी और कम वजन का तेज, मापनीय और सटीक आंकलन प्रदान करता है।
ओपन-एक्सेस जर्नल MICCAI में प्रकाशित यह नई विधि, वैश्विक स्वास्थ्य की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक, बाल कुपोषण के सटीक और मापनीय आंकलन पर केंद्रित है।
अध्ययन में डोमेनएडेप्ट नामक एक नॉवेल मल्टीटास्किंग लर्निंग फ्रेमवर्क प्रस्तुत किया गया है जो डोमेन ज्ञान और पारस्परिक सूचना का उपयोग करके कार्य भार को गतिशील रूप से समायोजित करता है।
यह प्रणाली ऊंचाई, वजन और मध्य-ऊपरी भुजा परिधि (एमयूएसी) जैसे प्रमुख मानवमितीय मापों का अधिक सटीक रूप से अनुमान लगाने में सक्षम है, साथ ही कुपोषण संबंधी स्थितियों जैसे बौनापन, दुर्बलता और कम वजन का वर्गीकरण भी करती है।
इस अध्ययन का नेतृत्व करने वाले आईआईटी-एम्स में चिकित्सा प्रौद्योगिकी के डॉक्टरेट छात्र मिसाल खान ने बताया कि सिर्फ़ एक बच्चे की तस्वीरें खींचकर, हमारा ढांचा जटिल और समय लेने वाले मानवमितीय मापों की आवश्यकता के बिना पोषण संबंधी स्थिति का अनुमान लगा सकता है।
मिसाल खान ने आगे कहा कि इससे कुपोषण की जांच तेज, अधिक सुलभ और अत्यधिक मापनीय हो जाती है, खासकर संसाधन-सीमित परिस्थितियों में।
शोध का प्रमुख आधार
इसके अलावा, इस शोध का एक प्रमुख आधार एंथ्रोविज़न है, जो अपनी तरह का पहला डेटासेट है जिसमें 2,141 बच्चों की 16,938 मल्टी-पोज़ तस्वीरें शामिल हैं, जिन्हें क्लिनिकल (एम्स जोधपुर) और सामुदायिक (राजस्थान के सरकारी स्कूल) दोनों जगहों से एकत्र किया गया है।
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