बच्चों को इस तरह से शिक्षित किया जाए कि वे हमेशा महिलाओं की गरिमा बनाए रखें - राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
Press Trust of India | September 6, 2024 | 11:26 AM IST | 2 mins read
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षक को प्रत्येक बच्चे की स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानना होगा और उसे बाहर लाना होगा।
नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बृहस्पतिवार (5 सितंबर) को इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के प्रति सम्मान केवल बातों तक ही सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे अमल में भी लाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों और माता-पिता की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को इस तरह से शिक्षित करें कि वे हमेशा महिलाओं की गरिमा बनाए रखें।
मुर्मू ने राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘किसी भी समाज में महिलाओं की स्थिति उनके विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड है। शिक्षकों और अभिभावकों की यह जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को इस तरह शिक्षित करें कि वे हमेशा महिलाओं की गरिमा बनाये रखें।’’
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षकों का यह कर्तव्य है कि वे ऐसे नागरिक तैयार करें जो न केवल शिक्षित हों बल्कि संवेदनशील, ईमानदार और व्यावहारिक भी हों। मुर्मू ने कहा कि किसी भी शिक्षा प्रणाली की सफलता में शिक्षक सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उन्होंने आगे कहा, ‘‘जीवन में आगे बढ़ना ही सफलता है, लेकिन जीवन का अर्थ दूसरों के कल्याण के लिए काम करने में निहित है। हममें करुणा होनी चाहिए। हमारा आचरण नैतिक होना चाहिए। सार्थक जीवन में ही सफल जीवन निहित है। छात्रों को ये मूल्य सिखाना शिक्षकों का कर्तव्य है।’’
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उन्होंने कहा कि, ‘‘शिक्षण केवल एक नौकरी नहीं है। यह मानव के विकास का एक पवित्र मिशन है। यदि कोई बच्चा अच्छा प्रदर्शन करने में सक्षम नहीं है, तो शिक्षा प्रणाली और शिक्षकों की जिम्मेदारी अधिक होती है।’’ आगे कहा कि शिक्षक अक्सर केवल उन विद्यार्थियों पर ध्यान केंद्रित करते हैं जो अकादमिक रूप से उत्कृष्ट होते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘हालांकि, उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन उत्कृष्टता का केवल एक आयाम है। एक बच्चा बहुत अच्छा खिलाड़ी हो सकता है, किसी बच्चे में नेतृत्व कौशल हो सकता है, कोई बच्चा सामाजिक कल्याण गतिविधियों में उत्साहपूर्वक भाग लेने में रुचि रखता है। शिक्षक को प्रत्येक बच्चे की स्वाभाविक प्रतिभा को पहचानना होगा और उसे बाहर लाना होगा।’’
राष्ट्रपति ने शिक्षकों से कहा कि उनके छात्रों की पीढ़ी एक विकसित भारत का निर्माण करेगी। उन्होंने शिक्षकों और विद्यार्थियों को वैश्विक सोच और विश्वस्तरीय कौशल रखने की सलाह दी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन में आगे कहा कि, ‘‘महान शिक्षक महान राष्ट्र का निर्माण करते हैं। केवल विकसित मानसिकता वाले शिक्षक ही ऐसे नागरिक तैयार कर सकते हैं जो विकसित राष्ट्र का निर्माण करेंगे। मुझे विश्वास है कि विद्यार्थियों को प्रेरित करके हमारे शिक्षक भारत को दुनिया का ज्ञान केंद्र बनाएंगे।’’
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