CBSE Three-Language Policy: सीबीएसई की तीन भाषा नीति मोदी सरकार के राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा- कांग्रेस

Press Trust of India | June 4, 2026 | 02:53 PM IST | 2 mins read

मई 2026 में, सीबीएसई ने एक परिपत्र जारी कर स्कूलों से एक जुलाई, 2026 से 9वीं और 10वीं के पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा जोड़ने के लिए कहा।

बोर्ड ने स्कूलों से तीसरी भाषा सिखाने के लिए एनसीईआरटी की छठी कक्षा की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने के लिए कहा। (इमेज-आधिकारिक वेबसाइट/CBSE)

नई दिल्ली: कांग्रेस ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSSE) की कक्षा 9 और 10 में तीन भाषाओं के फार्मूले (Three-Language Policy) को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा और आरोप लगाया कि यह सिर्फ राजनीतिक एजेंडा है। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह मांग दोहराई कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।

रमेश ने ‘एक्स’ पर पोस्ट में कहा, ओएसएम प्रणाली के अक्षम तरीके से जल्दबाजी में कार्यान्वयन और इसकी निविदा प्रक्रिया में भ्रष्टाचार के अलावा, सीबीएसई 9वीं और 10वीं कक्षा में तीन-भाषा नीति के मनमाने ढंग से कार्यान्वयन के लिए भी खबरों में रहा है।”

उन्होंने कहा, “दिसंबर 2025 में सीबीएसई की संचालन इकाई की अर्ध-वार्षिक बैठक हुई। उसने विशेष रूप से और स्पष्ट रूप से अपनी पाठ्यचर्या समिति की सिफारिश की पुष्टि की कि सीबीएसई को एनसीईआरटी द्वारा भाषाओं की वर्गीकृत पाठ्यपुस्तकों के जारी होने तक 'विशेष रूप से भाषा के संबंध में' अध्ययन की अपनी मौजूदा योजना जारी रखनी चाहिए।”

उनका कहना है कि सीबीएसई के चेयरमैन और सचिव, जो अब स्थानांतरित हो चुके हैं, ने इस निर्णय पर अपने हस्ताक्षर संलग्न किए। रमेश ने कहा, “मई 2026 में, सीबीएसई ने एक परिपत्र जारी कर स्कूलों से एक जुलाई, 2026 से 9वीं और 10वीं के पाठ्यक्रम में तीसरी भाषा जोड़ने के लिए कहा। इसने स्कूलों से अपने 9वीं कक्षा के छात्रों को तीसरी भाषा सिखाने के लिए एनसीईआरटी की छठी कक्षा की पाठ्यपुस्तकों का उपयोग करने के लिए कहा।”

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उनके मुताबिक, सीबीएसई ने अपने स्वयं के शासी निकाय द्वारा अनुमोदित होने के बाद भी अपनी पाठ्यचर्या समिति की सिफारिश को प्रभावी ढंग से खारिज कर दिया। रमेश ने सवाल किया कि सीबीएसई ने यह यू-टर्न क्यों और किसके आदेश पर लिया?

उन्होंने कहा , “इस कदम का कोई शैक्षणिक औचित्य नहीं है, जो शैक्षणिक कैलेंडर और स्कूल की योजना को अव्यवस्था में डाल रहा है और लाखों छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को बाधित कर रहा है।” उन्होंने दावा किया, “यहां एकमात्र एजेंडा स्पष्ट रूप से राजनीतिक है। स्पष्ट रूप से, शिक्षा मंत्रालय और सीबीएसई जैसे उसके स्वायत्त निकाय अपने स्वयं के शिक्षाविदों की सलाह के बजाय मोदी सरकार की सनक और राजनीतिक एजेंडे पर काम करते हैं।”

रमेश का कहना है कि जब जवाबदेही की बात आती है, तो सीबीएसई चेयरमैन और सचिव जैसे अधिकारियों को स्थानांतरित कर दिया जाता है, जबकि “प्रधानमंत्री के मंत्रिमंडल में मौजूद उनके राजनीतिक बॉस को बचाया जाता है।” उन्होंने कहा, “मंत्री प्रधान को इस्तीफा देना चाहिए।”

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