Press Trust of India | February 25, 2026 | 08:17 AM IST | 1 min read
न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह आदेश 19 फरवरी को मेसर्स राजीव प्रकाशन की एक याचिका पर पारित किया।

प्रयागराज: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक आदेश में कहा है कि हाई स्कूल (10वीं कक्षा) और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) की पाठ्य पुस्तकें तय करना उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) प्रयागराज के सचिव की शक्तियों एवं अधिकार क्षेत्र में आता है। न्यायमूर्ति नीरज तिवारी और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की पीठ ने यह आदेश 19 फरवरी को मेसर्स राजीव प्रकाशन की एक याचिका पर पारित किया।
याचिकाकर्ता ने यूपी बोर्ड के सचिव के एक आदेश को अदालत में चुनौती दी थी। अदालत ने याचिका का निपटारा 2014 में इसी मुद्दे पर दिए गए अपने पहले के फैसले के आधार पर किया।
पीठ ने कहा, "हमारी राय है कि इस याचिका पर किसी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है, क्योंकि हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा में पढ़ाई के लिए पुस्तकें तय करना बोर्ड के सचिव की शक्तियों और अधिकार क्षेत्र में आता है।"
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कोर्ट ने कहा, "हालांकि, अगर पिटीशनर किसी कानून या नियम का उल्लंघन नहीं कर रहा है, तो उसे ऐसी किताबें पब्लिश करने या खुले बाज़ार में बेचने से नहीं रोका जा सकता, भले ही ऐसी किताबें बोर्ड की किताबों के स्टैंडर्ड के हिसाब से न हों।"
पीठ ने इस मामले को निस्तारित करते हुए कहा, "हमने 15 अप्रैल 2014 के फैसले को पढ़ा है और हमारा मानना है कि इस याचिका में उठाया गया मुद्दा पूरी तरह से उस फैसले में शामिल है।"
मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकार का उद्देश्य केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता, तकनीकी शिक्षा, शोध और कौशल आधारित शिक्षा के माध्यम से उत्तर प्रदेश को ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में अग्रणी बनाना है।"
Santosh Kumar