UP Madrasas: यूपी के मदरसों में खत्म होगी कामिल-फाजिल डिग्री की मान्यता, मदरसे 12वीं तक दे सकेंगे शिक्षा
Saurabh Pandey | August 4, 2026 | 07:34 PM IST | 2 mins read
उत्तर प्रदेश सरकार राज्य की मदरसा शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव करने जा रही है, जिसके तहत 'कामिल' और 'फ़ाज़िल' डिग्री प्रोग्राम बंद कर दिए जाएंगे।
नई दिल्ली : उत्तर प्रदेश सरकार राज्य के मदरसों में कामिल (ग्रेजुएट-लेवल) और फ़ाज़िल (पोस्ट-ग्रेजुएट लेवल) कोर्स बंद करने जा रही है। अब इनकी एकेडमिक मान्यता सिर्फ 12वीं कक्षा (आलिम लेवल) तक ही सीमित रहेगी। यह कदम सुप्रीम कोर्ट के 2024 के उस फैसले के बाद उठाया गया है, जिसमें कहा गया था कि मदरसा बोर्ड के पास हायर एजुकेशन की डिग्री देने का कानूनी अधिकार नहीं है, क्योंकि ये अधिकार सिर्फ यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (UGC) एक्ट के तहत मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटीज के पास होते हैं।
उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड (UPBME) ने सभी मान्यता प्राप्त मदरसों को निर्देश दिया है कि वे कामिल और फ़ाज़िल प्रोग्राम में छात्रों का एडमिशन लेना बंद कर दें। हालांकि धार्मिक शिक्षा निजी तौर पर जारी रह सकती है, लेकिन इन कोर्स को अब राज्य की मान्यता नहीं मिलेगी और न ही इन्हें यूनिवर्सिटी की डिग्री के बराबर माना जाएगा। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा एक्ट में प्रस्तावित बदलावों का मकसद मदरसा सिस्टम को देश के मुख्यधारा के शिक्षा ढांचे के अनुरूप बनाना है।
इस पॉलिसी की शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के 5 नवंबर, 2024 को आए अहम फैसले से हुई है। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड एक्ट, 2004 की संवैधानिक वैधता को तो बरकरार रखा, लेकिन उन प्रावधानों को रद्द कर दिया जिनके तहत मदरसा बोर्ड कामिल और फ़ाज़िल की योग्यता (डिग्री) दे सकता था।
लगभग 37,000 छात्रों पर पड़ेगा असर
इस फैसले का असर उत्तर प्रदेश में कामिल और फ़ाज़िल कोर्स में दाखिला लेने वाले लगभग 37,000 छात्रों पर पड़ने की उम्मीद है। कई छात्रों ने अपने एकेडमिक भविष्य को लेकर अनिश्चितता जाहिर की है, खासकर वे छात्र जो पहले से ही इन प्रोग्राम्स की पढ़ाई कर रहे हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सरकार ने अभी तक सभी प्रभावित छात्रों के लिए कोई व्यापक ट्रांजिशन पॉलिसी घोषित नहीं की है, हालांकि मदरसा छात्रों को राज्य के विश्वविद्यालयों से जोड़ने पर बातचीत हुई है।
फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं
इस फैसले पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं आई हैं। समर्थकों का मानना है कि इस कदम से मदरसा स्टूडेंट्स मुख्यधारा की हायर एजुकेशन से जुड़ेंगे और यह सुनिश्चित होगा कि डिग्रियां राष्ट्रीय एकेडमिक मानकों के अनुरूप हों। हालांकि, मदरसा एडमिनिस्ट्रेटर्स और मुस्लिम समुदाय के कुछ वर्गों ने कामिल और फाज़िल प्रोग्राम में एनरोल हुए स्टूडेंट्स के भविष्य को लेकर चिंता जताई है। उनका तर्क है कि एडवांस्ड इस्लामिक स्टडीज कर रहे हजारों स्टूडेंट्स अब अनिश्चितता का सामना कर रहे हैं, जब तक कि कोई स्पष्ट वैकल्पिक रास्ता नहीं बनाया जाता।
कामिल-फ़ाज़िल कोर्स के बारे में...
कामिल कोर्स तीन साल का प्रोग्राम है जिसमें अरबी, फ़ारसी और इस्लामिक स्टडीज़ जैसे विषय शामिल हैं। उत्तर प्रदेश मदरसा शिक्षा बोर्ड ने इसे बैचलर डिग्री के बराबर मान्यता दी है।
कामिल पूरा करने वाले छात्र फ़ाज़िल कर सकते हैं, जो इस्लामिक और उससे जुड़े विषयों में दो साल का एडवांस्ड प्रोग्राम है। मदरसा शिक्षा प्रणाली में इसे पारंपरिक रूप से मास्टर डिग्री के बराबर माना जाता रहा है।
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