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‘उत्तर प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में स्थापित करेगा नए मानदंड’ - सिटी मांटेसरी स्कूल कार्यक्रम में राजनाथ सिंह

Press Trust of India | March 13, 2026 | 04:16 PM IST | 2 mins read

रक्षा मंत्री ने कहा, उत्तर प्रदेश के शिक्षण संस्थान न केवल राज्य के छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए भी आकर्षण के केंद्र बनकर उभरेंगे।

लखनऊ स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल गोल्फ सिटी परिसर के मुख्य भवन का राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। (आधिकारिक एक्स/@rajnathsingh)
लखनऊ स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल गोल्फ सिटी परिसर के मुख्य भवन का राजनाथ सिंह ने उद्घाटन किया। (आधिकारिक एक्स/@rajnathsingh)

लखनऊ: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 13 मार्च को कहा कि उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा। आगे कहा, राज्य का ध्यान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने पर केंद्रित है जिसमें बच्चों का विकास सीखने के सकारात्मक माहौल में हो और वे आगे बढ़ सकें।

सिंह ने लखनऊ में स्थित सिटी मांटेसरी स्कूल गोल्फ सिटी परिसर के मुख्य भवन के उद्घाटन के अवसर पर कहा, “यहां के शिक्षण संस्थान न केवल राज्य के छात्रों के लिए, बल्कि पूरे देश के छात्रों के लिए भी आकर्षण के केंद्र बनकर उभरेंगे।”

उन्होंने कहा कि राज्य का ध्यान केवल स्कूल और कॉलेज खोलने पर नहीं है बल्कि ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है, जिसमें बच्चे अपनी पढ़ाई के साथ-साथ सीखने के सकारात्मक माहौल में आगे बढ़ सकें। सिंह ने कहा, “मुझे विश्वास है कि इस प्रकार के समन्वित प्रयासों के कारण उत्तर प्रदेश आने वाले वर्षों में शिक्षा के क्षेत्र में नए मानदंड स्थापित करेगा।”

लखनऊ से सांसद सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश एक व्यापक नजरिए के साथ आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, “हम सभी ने राज्य को पिछले कुछ वर्षों में सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति करते देखा है। बुनियादी ढांचे, निवेश, उद्योग और शिक्षा के क्षेत्रों में उत्तर प्रदेश ने नयी गति हासिल की है।”

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उन्होंने सावित्रीबाई फुले और ज्योतिबा फुले का उल्लेख करते हुए कहा कि इन दूरदर्शी हस्तियों ने समाज के वंचित वर्गों यानी उन लोगों तक शिक्षा पहुंचाई, जो सामाजिक पायदान के सबसे निचले स्तर पर थे। उन्होंने कहा, “उन्होंने यह दिखाया कि समाज में समानता और जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी साधन है।”

मंत्री ने कहा, “भारत, अपने नाम के अनुरूप हमेशा ज्ञान की खोज में लगा रहा है। यदि आप इसका इतिहास देखें, तो प्राचीन काल से लेकर आज तक भारत इस ज्ञान-यात्रा के प्रति दृढ़तापूर्वक समर्पित रहा है।”

उन्होंने कहा कि भारत की ज्ञान परंपराओं में शिक्षा को कभी केवल जानकारी हासिल करने का साधन नहीं माना गया, बल्कि इसे चरित्र निर्माण का एक महत्वपूर्ण माध्यम समझा गया। उन्होंने कहा कि जब तक्षशिला, नालंदा और विक्रमशिला जैसे महान विश्वविद्यालय फले-फूले, तब दुनिया के दूर-दराज के हिस्सों से छात्र इन प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में पढ़ने के लिए भारत आया करते थे।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, “आपने संभवतः फाह्यान और ह्वेन सांग के नाम सुने होंगे। ये लोग भी भारत आए थे। उन्होंने यह यात्रा इसलिए की क्योंकि इस भूमि में शिक्षा में न केवल ज्ञान प्राप्त करना शामिल है, बल्कि जीवन मूल्यों का समावेश भी शामिल है।”

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