Rajasthan SI Exam: 713 के बजाय केवल 1 उम्मीदवार को परीक्षा में बैठने की अनुमति, कोर्ट का जारी आदेश में संशोधन
Press Trust of India | April 3, 2026 | 04:24 PM IST | 2 mins read
आरपीएससी के वकील की दलीलों का संज्ञान लेते हुए अपने आदेश में संशोधन किया और सिर्फ सूरज मल मीणा को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश दिया।
नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय ने 2 अप्रैल के अपने आदेश में संशोधन करते हुए राजस्थान लोक सेवा आयोग को निर्देश दिया कि वह 5-6 अप्रैल को निर्धारित पुलिस उपनिरीक्षक/प्लाटून कमांडर भर्ती परीक्षा-2025 में 713 अभ्यर्थियों के बजाय केवल एक उम्मीदवार को ही बैठने की अनुमति दे। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा की पीठ आज अवकाश के दिन बैठी और आरपीएससी को राहत देते हुए बृहस्पतिवार के अपने आदेश में संशोधन किया।
एसआई परीक्षा में 77 लाख से अधिक अभ्यर्थियों के शामिल होने की संभावना है। अदालत ने आरपीएससी की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें आरोप लगाया गया कि पीठ से महत्वपूर्ण तथ्य छिपाए गए हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 2 अप्रैल को राजस्थान लोक सेवा आयोग के मामले में अदालत का रुख करने वाले सूरज मल मीणा सहित 713 अभ्यर्थियों को अनंतिम प्रवेश पत्र जारी करने का आदेश दिया था।
Rajasthan SI Exam: 1 अभ्यर्थी को परीक्षा में बैठने की अनुमति
अदालत ने कहा था कि उसके आदेश के अनुसार परीक्षा में बैठने वाले इन अभ्यर्थियों के परिणाम तब तक जारी नहीं किए जाएंगे, जब तक कि राजस्थान हाईकोर्ट उससे (परीक्षा) संबंधित दो अलग-अलग याचिकाओं पर फैसला नहीं सुना देता।
उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को आरपीएससी के वकील की दलीलों का संज्ञान लेते हुए अपने आदेश में संशोधन किया और सिर्फ मीणा को परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का निर्देश दिया।
हालांकि, पीठ ने कहा कि अन्य अभ्यर्थी हाई कोर्ट का रुख कर सकते हैं और अगर लंबित फैसले में आयोग को उनके लिए एक और परीक्षा आयोजित करने का निर्देश दिया जाता है, तो वे परीक्षा में बैठने की अनुमति देने का अनुरोध कर सकते हैं।
परीक्षा में अनियमितताओं के आरोप
राजस्थान में उपनिरीक्षकों और प्लाटून कमांडर की भर्ती परीक्षा को बड़े पैमाने पर अनियमितताओं और कदाचार के आरोपों के बाद रद्द कर दिया गया था। आरपीएससी ने उन अभ्यर्थियों को आयु में कोई छूट दिए बिना दोबारा परीक्षा आयोजित करने का फैसला लिया, जिन्हें इस आधार पर परीक्षा देने से रोक दिया गया था।
फैसले के खिलाफ जयपुर उच्च न्यायालय की एकल पीठ के समक्ष एक याचिका दायर की गई, जिसने अभ्यर्थियों को परीक्षा में बैठने की अस्थायी अनुमति दे दी। हालांकि, बाद में उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने इस आदेश पर रोक लगा दी, जिसके चलते अभ्यर्थियों ने उच्चतम न्यायालय का रुख किया।
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