Saurabh Pandey | July 7, 2026 | 04:37 PM IST | 3 mins read
NEET-UG 2027 परीक्षा अब पेन-पेपर मोड के बजाय पूरी तरह ऑनलाइन कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) फॉर्मेट में 5 से 6 दिनों तक विभिन्न शिफ्टों में आयोजित की जाएगी। इस ऐतिहासिक बदलाव के तहत पेपर लीक रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए देश भर में परीक्षा केंद्रों की संख्या 5,000 से घटाकर केवल 1,000 की जाएगी।

नई दिल्ली : देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा 'नीट-यूजी' (NEET-UG) को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम उठाने जा रही है। 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक रिपोर्ट के अनुसार, नीट-यूजी परीक्षा अगले साल से पूरी तरह 'कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट' (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही अब यह परीक्षा केवल एक दिन में न होकर 5 से 6 दिनों के भीतर अलग-अलग पालियों में कराई जाएगी।
अब तक नीट परीक्षा पारंपरिक पेन-एंड-पेपर (ओएमआर शीट) मोड में आयोजित की जाती रही है, जिससे देश भर में पेपर लीक होने और स्ट्रांग रूम से सुरक्षा में सेंध लगने का खतरा बना रहता था। इस जोखिम को पूरी तरह खत्म करने के लिए सरकार इसे पूरी तरह से कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन फॉर्मेट में बदलने जा रही है।
साल 2027 से छात्रों को कंप्यूटर स्क्रीन पर ही अपने प्रश्नों के उत्तर देने होंगे। चूंकि परीक्षा कई दिनों तक और कई पालियों में चलेगी, इसलिए इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षा की तर्ज पर इसमें भी 'नॉर्मलाइजेशन' प्रक्रिया लागू की जाएगी, ताकि सभी पालियों के छात्रों का मूल्यांकन निष्पक्ष और बराबरी से हो सके।
नीट परीक्षा को ज्यादा सुरक्षित और फुलप्रूफ बनाने के लिए एनटीए केंद्रों की संख्या में भारी कटौती करने जा रहा है। वर्तमान में यह परीक्षा देश भर के लगभग 5,000 केंद्रों पर आयोजित की जाती है, जिनमें कई निजी स्कूल और दूर-दराज के केंद्र भी शामिल होते हैं, जहां सुरक्षा की कड़ाई से निगरानी करना मुश्किल होता है। नए बदलाव के तहत, साल 2027 से केंद्रों की संख्या घटाकर मात्र 1,000 के आसपास कर दी जाएगी। ये चुनिंदा केंद्र देश के करीब 500 प्रमुख शहरों में ही स्थित होंगे, जिससे एनटीए और सुरक्षा एजेंसियों को हर एक कंप्यूटर लैब पर कड़ा डिजिटल पहरा रखने में आसानी होगी। इस नए पैटर्न के तहत हर दिन लगभग 5 लाख उम्मीदवारों के परीक्षा देने की व्यवस्था की जाएगी। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये केंद्र मुख्य रूप से केंद्रीय विद्यालय (Kendriya Vidyalayas) और अन्य सरकारी शैक्षणिक संस्थानों में बनाए जाएंगे।
नीट परीक्षा में पारदर्शिता लाने और एनटीए के कामकाज में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने पूर्व इसरो (ISRO) प्रमुख के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल एक्सपर्ट कमेटी का गठन किया था। इस कमेटी ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि पेपर लीक जैसी घटनाओं को जड़ से खत्म करने का एकमात्र तरीका परीक्षा को डिजिटल मोड में ले जाना और इसे सरकारी या अत्यधिक विश्वसनीय डिजिटल केंद्रों (जैसे केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय और टीसीएस के प्राधिकृत सेंटर्स) में ही आयोजित करना है। शिक्षा मंत्रालय ने इसी कमेटी के सुझावों और एनटीए द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किए गए रोडमैप के आधार पर इस नई नीति को मंजूरी दी है।
एनटीए के उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार, परीक्षा के आयोजन के तरीके में तो यह आमूलचूल बदलाव हो रहा है, लेकिन उम्मीदवारों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। परीक्षा के मुख्य पाठ्यक्रम (Syllabus), प्रश्नों के स्तर और विषयों के वेटेज में कोई बदलाव नहीं किया जा रहा है। छात्रों को तैयारी के लिए वही मेडिकल सिलेबस पढ़ना होगा। हालांकि, मल्टी-शिफ्ट परीक्षा होने के कारण एनटीए अब अत्यधिक सुरक्षित प्रश्न बैंक तैयार करने और रीयल-टाइम इंक्रिप्शन सॉफ्टवेयर को मजबूत करने पर काम कर रहा है, जिसका अंतिम परीक्षण और आधिकारिक रूप से विस्तृत अधिसूचना जल्द ही जारी की जाएगी।