Saurabh Pandey | June 24, 2026 | 05:45 PM IST | 3 mins read
मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मण्डल ने हाई कोर्ट के आदेश पर प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 के लिए पोर्टल खोल दिया है, जिसके तहत विशेष शिक्षा डिप्लोमा धारक अभ्यर्थी 5% बोनस अंकों के लिए 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक अपने दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं।

नई दिल्ली : मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) की तरफ से प्राथमिक शिक्षक भर्ती परीक्षा देने वाले 'विशेष शिक्षा' डिप्लोमा (Special D.El.Ed.) धारकों के लिए बड़ी खबर है। हाई कोर्ट के आदेश के बाद कर्मचारी चयन मंडल ने उनके लिए दस्तावेज अपलोड करने का पोर्टल खोल दिया है। जिन अभ्यर्थियों ने फॉर्म भरते समय इस डिप्लोमा के विकल्प पर हाँ टिक किया था, वे अब 24 जून से 8 जुलाई 2026 तक अपने दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड कर सकते हैं।
मंडल ने यह पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है कि दस्तावेज अपलोड करने की यह प्रक्रिया केवल और केवल उन अभ्यर्थियों के लिए है, जिन्होंने मुख्य परीक्षा का फॉर्म भरते समय आरसीआई (RCI) से मान्यता प्राप्त 2 वर्षीय 'विशेष शिक्षा में प्रारंभिक शिक्षा डिप्लोमा' धारित होने के विकल्प में हाँ पर टिक किया था। योग्य उम्मीदवार मंडल की आधिकारिक वेबसाइट esb.mponline.gov.in पर जाकर निर्धारित पोर्टल शुल्क का भुगतान करके 8 जुलाई 2026 तक अपने दस्तावेज अनिवार्य रूप से अपलोड कर दें। तय समय सीमा के बाद किसी भी आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।
इस पूरी कवायद का मुख्य उद्देश्य सही और योग्य उम्मीदवारों को बोनस अंकों का लाभ देना है। मंडल द्वारा स्कूल शिक्षा विभाग एवं जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत 9 अक्टूबर 2025 से 13 अक्टूबर 2025 तक प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा-2025 आयोजित की गई थी। इस परीक्षा के अनुसार, विशेष शिक्षा में डिप्लोमा धारक अभ्यर्थियों को उनके प्राप्तांकों का 5 प्रतिशत बोनस अंक के रूप में दिया जाना है। इसी बोनस अंक के आधार पर मेरिट तय होगी और उम्मीदवारों को 'विशेष शिक्षक' के पदों पर नियुक्त किया जाएगा।
प्राथमिक शिक्षक चयन परीक्षा कुल 100 अंकों की आयोजित की जाती है। 5% बोनस अंक मिलने का सीधा मतलब है कि योग्य उम्मीदवारों को उनके प्राप्तांकों के आधार पर सीधा फायदा मिलेगा। यदि किसी को 70 अंक मिले हैं, तो बोनस के बाद उसका स्कोर 73.5 हो जाएगा।इस बोनस अंक की वजह से सामान्य मेरिट सूची और 'विशेष शिक्षक' की मेरिट सूची में बड़ा अंतर देखने को मिलेगा, जिससे कट-ऑफ काफी ऊपर जा सकती है।
दरअसल, मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दिव्यांग बच्चों को शिक्षा देने के लिए 'विशेष शिक्षकों' की बड़ी जरूरत है। परीक्षा की नियम पुस्तिका के अनुसार इन पदों के लिए 5% बोनस अंकों का प्रावधान था, लेकिन कई सामान्य अभ्यर्थियों ने भी फॉर्म भरते समय गलत तरीके से इस विकल्प को चुन लिया था। हाई कोर्ट के इस कड़े रुख के बाद अब आरसीआई (RCI) से मान्यता प्राप्त असली डिप्लोमा धारकों को ही इसका लाभ मिल सकेगा और फर्जी जानकारी देने वाले उम्मीदवार भर्ती प्रक्रिया से सीधे बाहर हो जाएंगे।
मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में दिव्यांग (दिव्यांगजन) बच्चों को पढ़ाने के लिए 'विशेष शिक्षकों' की भारी कमी है। आरसीआई (RCI) से मान्यता प्राप्त स्पेशल डी.एल.एड. धारक शिक्षक ही इन मूक-बधिर, दृष्टिबाधित या मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण बच्चों को विशेष तकनीकों (जैसे ब्रेल लिपि या साइन लैंग्वेज) के जरिए पढ़ाते हैं। यह भर्ती उसी बैकलॉग और कमी को पूरा करने के लिए की जा रही है।