Press Trust of India | October 26, 2026 | 10:40 PM IST | 2 mins read
यह आंदोलन इस महीने की शुरुआत में छात्र संघ को बहाल करने की मांग के साथ शुरू हुआ था। जामिया में 2006 के बाद से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं।

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) की बहाली की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने सोमवार को आंदोलन खत्म करने से इनकार कर दिया। उन्होंने विश्वविद्यालय छात्र संघ चुनाव की तिथि घोषित करने की मांग की। इससे पहले दिन में विश्वविद्यालय ने दो सप्ताह से अधिक समय से जारी गतिरोध खत्म करने के लिए चुनाव कराने का आदेश जारी किया था।
जामिया नगर स्थित सैयदा मंजिल में 'जामिया कलेक्टिव' की ओर से आयोजित संवाददाता सम्मेलन में पूर्व छात्रों और छात्र प्रतिनिधियों ने करीब दो दशक से निर्वाचित छात्र संघ नहीं होने, प्रदर्शनकारियों की कथित निगरानी और छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर चिंता जताई। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के छात्र प्रतिनिधियों ने विश्वविद्यालय के सुरक्षा सलाहकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस पद का इस्तेमाल प्रदर्शन में शामिल छात्रों की निगरानी करने और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा दिल्ली पुलिस के बीच संपर्क स्थापित करने के लिए किया जा रहा है। जामिया की पूर्व छात्रा समीना मिश्रा ने परिसर में लोकतांत्रिक गतिविधियों के लिए जगह बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) से जुड़े छात्र समान ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों की निगरानी की जा रही है और उनकी शिकायतें प्रॉक्टर कार्यालय को भेजी जा रही हैं।
छात्रों ने सुरक्षा सलाहकार का पद समाप्त करने और मुख्य प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग की। वक्ताओं ने परिसर में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती पर भी चिंता जताई। छात्रों ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय में भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के जवान मौजूद थे। उन्होंने यह भी दावा किया कि जारी गतिरोध के बीच कैंटीन और पुस्तकालय बंद रहे।
छात्रों ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) को बहाल करने की मांग दोहराई और चुनाव के लिए समयबद्ध कार्यक्रम घोषित करने की अपील की। उन्होंने छात्र संघ का संविधान तैयार करने वाली समिति में छात्रों को प्रतिनिधित्व देने, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेने और छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग की जांच कराने की मांग भी की।
विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से गतिरोध खत्म करने के हालिया प्रयासों के बावजूद प्रदर्शन जारी है। प्रशासन ने सोमवार को आदेश दिया कि छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराए जाएंगे। साथ ही, मौजूदा प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस वापस ले लिए गए।
प्रशासन ने इससे पहले जेएमआईएसयू का संविधान तैयार करने के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की थी। प्रशासन ने यह भी कहा था कि प्रदर्शन से जुड़े मामलों में छात्रों के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई की समीक्षा की जाएगी।
विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन स्थल पर बढ़ते तनाव के बीच छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए 24 अक्टूबर को सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने का आदेश दिया था। यह आंदोलन इस महीने की शुरुआत में छात्र संघ को बहाल करने की मांग के साथ शुरू हुआ था। जामिया में 2006 के बाद से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं। इस मुद्दे को लेकर चार छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।