Press Trust of India | October 26, 2026 | 04:40 PM IST | 2 mins read
न्यायमूर्ति कुमार ने अहमद के वकील से कहा, “हम इसमें कोई बदलाव नहीं करेंगे... हमें पता है कि आपने दिल्ली के सभी लॉ कॉलेजों को छोड़कर उस लॉ कॉलेज में दाखिला क्यों लिया।”

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय (SC) ने दिल्ली दंगों के मामले के एक आरोपी को सोमवार को गाजियाबाद के एक विश्वविद्यालय में एलएलबी की कक्षा में शामिल होने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। आरोपी वर्तमान में जमानत पर जेल से बाहर है। न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने आरोपी शादाब अहमद पर लगाई गई जमानत की शर्तों में बदलाव करने से इनकार कर दिया। इन शर्तों के तहत उसे मामले की सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय राजधानी से बाहर नहीं जाने का निर्देश दिया गया था।
न्यायमूर्ति कुमार ने अहमद के वकील से कहा, “हम इसमें कोई बदलाव नहीं करेंगे... हमें पता है कि आपने दिल्ली के सभी लॉ कॉलेजों को छोड़कर उस लॉ कॉलेज में दाखिला क्यों लिया।” अदालत का रुख भांपते हुए, वकील ने जमानत की शर्त में बदलाव के अनुरोध वाली अपनी अर्जी वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे शीर्ष अदालत ने मंजूर कर लिया। शुरुआत में, वकील ने दलील दी कि अहमद ने दिल्ली विश्वविद्यालय के एलएलबी पाठ्यक्रम में दाखिले के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसे दाखिला नहीं मिल सका था।
वकील ने बताया कि बाद में उसे गाजियाबाद के एक विश्वविद्यालय में दाखिला मिल गया और यह भी कहा कि अहमद अब खुद में “सुधार” कर रहा है। पीठ ने अर्जी वापस ले ली गई मानकर खारिज कर दी और आरोपी को राहत के लिए अधीनस्थ अदालत का रुख करने की छूट दी। अहमद ने जमानत की एक शर्त में बदलाव के लिए अर्जी दायर की थी। इस शर्त के अनुसार, वह मामले की सुनवाई कर रही अदालत की पूर्व अनुमति के बिना राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से बाहर नहीं जा सकता। उसने जमानत की उस शर्त में बदलाव का भी अनुरोध किया था, जिसके तहत उसे सप्ताह में दो बार - सोमवार और बृहस्पतिवार को - दिल्ली पुलिस के अपराध शाखा थाने में अपनी हाजिरी लगानी होती है।
शीर्ष अदालत ने 5 जनवरी को उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से इनकार कर दिया, जबकि अहमद और चार अन्य लोगों को जमानत दे दी थी। अदालत ने उन पर 11 शर्तें लगाईं और कहा कि मिली हुई छूट का गलत इस्तेमाल होने पर जमानत रद्द कर दी जाएगी। दंगों का “सरगना” होने के आरोप में सभी सात आरोपियों के खिलाफ गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था।
उत्तर-पूर्वी दिल्ली में फरवरी 2020 के दंगे, नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के दौरान हुए थे। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हो गई और 700 से ज्यादा घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने साजिश के मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया था। इनमें से कई आरोपियों को अब तक जमानत मिल चुकी है।