Press Trust of India | October 26, 2026 | 07:54 AM IST | 2 mins read
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर, प्राथमिकी दर्ज की। आंदोलन कर रहे विद्यार्थी छात्र संघ को बहाल करने और अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया परिसर में कथित तौर पर अनधिकृत रूप से प्रवेश करने और छात्रसंघ चुनाव के लिए जारी आंदोलन के दौरान अशांति भड़काने के आरोप में कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और इमरान प्रतापगढ़ी तथा अन्य के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई है। सूत्रों ने रविवार को यह जानकारी दी। विश्वविद्यालय प्रशासन ने कांग्रेस के लोकसभा सदस्य मसूद, राज्यसभा सदस्य प्रतापगढ़ी और अन्य के खिलाफ दिल्ली पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने विश्वविद्यालय प्रशासन की शिकायत पर, प्राथमिकी दर्ज की। आंदोलन कर रहे विद्यार्थी छात्र संघ को बहाल करने और अपने खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई को वापस लेने की मांग कर रहे हैं।
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने आरोप लगाया है कि सैकड़ों पुलिसकर्मियों ने द्वार संख्या 7 के बाहर छात्रों को हिरासत में ले लिया और अधिकारी उन छात्रों को निशाना बना रहे हैं जो जेएमआईएसयू को बहाल करने की मांग कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर, एसएफआई ने इस स्थिति को छात्रों के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई बताया। उन्होंने छात्रों की हिरासत खत्म करने और छात्र संघ को बहाल करने की मांग की। इस पर पुलिस की ओर से फिलहाल कोई जवाब नहीं आया है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब विश्वविद्यालय ने प्रदर्शन स्थल पर बढ़ते तनाव के बीच छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन कर दी हैं।
शनिवार को कुलपति और कुलसचिव सहित 1,500 से अधिक शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों ने अंसारी सभागार के लॉन से द्वार संख्या 7 तक मार्च किया, ताकि वे प्रदर्शन कर रहे छात्रों को अपना आंदोलन वापस लेने के लिए मना सकें।
इसने बताया कि कर्मचारियों ने लगभग दो घंटे तक कई आग्रह किया, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने वह स्थान खाली करने से इनकार कर दिया। यह आरोप लगाया गया कि कुछ छात्रों ने सुरक्षा गार्डों, कर्मचारियों और शिक्षकों को धक्का दिया, जिसके बाद कर्मचारी वहां से हट गए।
हालांकि, एसएफआई की जामिया इकाई ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों-जिनमें प्रॉक्टर, कुलसचिव और सुरक्षा सलाहकार शामिल हैं-ने भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों को जबरन हटाने की कोशिश की, उनके तंबू उखाड़ दिए और इस दौरान छात्राओं को घसीटा गया।
वहां मौजूद एक विद्यार्थी ने यह भी आरोप लगाया कि परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जो छात्रों को अंदर जाने से रोक रहे थे। कुछ छात्रों को घसीटकर ले जाया गया और हिरासत में ले लिया गया। इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
यह विरोध प्रदर्शन लगभग 2 सप्ताह पहले छात्र संघ को बहाल करने की मांग को लेकर शुरू हुआ। छात्रों का कहना है कि 2006 से छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। एसएफआई के अनुसार, 4 छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं, जबकि 1 पीएचडी विद्यार्थी, गुलिस्तां-ए-ग़ालिब लॉन में अनिश्चितकालीन धरने पर बैठी है।