Press Trust of India | October 22, 2026 | 08:31 PM IST | 2 mins read
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से 'ए-प्लस' और 'ए-प्लस-प्लस' ग्रेड प्राप्त किए हैं।

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 22 अक्टूबर को विद्यार्थियों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर अत्यधिक निर्भर होने के बजाय अपनी बुद्धिमत्ता, विवेक और रचनात्मकता का उपयोग करने तथा शोध एवं नवाचार के जरिये समाज और देश के विकास में योगदान देने का आह्वान किया। राज्यपाल ने लखनऊ के महर्षि विश्वविद्यालय (MUIT) के 7वें दीक्षोत्सव को संबोधित करते हुए कहा कि विद्यार्थियों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखना चाहिए और अपने ज्ञान का उपयोग किसी को भ्रमित करने के बजाय समाज एवं राष्ट्र के हित में करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की जिम्मेदारी युवाओं पर है और विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा और कौशल पहचानकर उनका उपयोग देश की आवश्यकताओं के अनुरूप शोध एवं नवाचार में करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि विश्वविद्यालयों में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और उच्च शिक्षा को रोजगारोन्मुख बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे क्षेत्रों में हो रहे शोध का जिक्र करते हुए कहा कि आने वाला समय अंतरिक्ष का है। पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश के 19 राज्य विश्वविद्यालयों ने राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद (नैक) से 'ए-प्लस' और 'ए-प्लस-प्लस' ग्रेड प्राप्त किए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय पांच-पांच गांव गोद लेकर शिक्षा, स्वच्छता और पोषण के क्षेत्र में भी काम कर रहे हैं और यह कार्यक्रम करीब 200 गांवों में संचालित है।
Also readGujarat Schools: गुजरात में स्कूलों में प्रवेश के नियम सख्त, बिना अनुमति बाहरी लोगों के आने पर रोक
राज्यपाल ने विद्यार्थियों से माता-पिता का सम्मान करने, उनकी सेवा करने और वंचित वर्ग के बच्चों की शिक्षा एवं उत्थान में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलना चाहिए और समाज को बेटियों की सुरक्षा एवं सम्मान सुनिश्चित करना चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि जनसहयोग से पिछले छह वर्षों में प्रदेश के करीब 75,000 आंगनवाड़ी केंद्रों को बेहतर बनाया गया है और इस पर लगभग 180 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
इस अवसर पर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि दीक्षांत शिक्षा का अंत नहीं, बल्कि ज्ञान को जीवन में उतारते हुए नई जिम्मेदारियों के साथ आगे बढ़ने की शुरुआत है।
उन्होंने युवाओं से सकारात्मक सोच के साथ देश की एकता, प्रगति और विकास में सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया। दीक्षोत्सव के दौरान पटेल ने विद्यार्थियों की तकनीकी एवं नवाचार आधारित परियोजनाओं की प्रदर्शनी का अवलोकन किया और उन्हें अपने शोध को समाजोपयोगी बनाने के लिए प्रेरित किया। समारोह में महर्षि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, कुलपति प्रोफेसर बी पी सिंह, अन्य शिक्षक तथा विद्यार्थी मौजूद थे।