Press Trust of India | October 27, 2026 | 09:46 PM IST | 3 mins read
छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच छात्रों ने मंगलवार को प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने तथा परिसर की सुविधाएं बंद किए जाने का विरोध किया।

नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (JMISU) को बहाल करने की मांग को लेकर छात्रों का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गया। विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने का निर्णय लिए जाने के बावजूद छात्रों ने आंदोलन वापस लेने से इनकार कर दिया है। प्रदर्शनकारी छात्र चुनाव की निश्चित तारीख घोषित करने और संविधान को मंजूरी देने के लिए स्पष्ट समय-सीमा तय करने की मांग कर रहे हैं। विश्वविद्यालय में 2006 से छात्र संघ के चुनाव नहीं हुए हैं।
छात्र संघ की बहाली की मांग को लेकर जारी विरोध प्रदर्शन के बीच छात्रों ने मंगलवार को प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और कक्षाओं को ऑनलाइन माध्यम से संचालित करने तथा परिसर की सुविधाएं बंद किए जाने का विरोध किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई), जामिया ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में आरोप लगाया कि प्रशासन दिल्ली पुलिस की मदद से छात्र संघ चुनाव की पुष्टि करने वाला नोटिस जारी करने के अलावा बाकी सभी कदम उठा रहा है। पोस्ट में कहा गया, “हम परिसर बंद किए जाने का विरोध करते हैं। हम ऑनलाइन कक्षाओं का विरोध करते हैं। हम एक इंच भी पीछे नहीं हटेंगे। जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ (जेएमआईएसयू) को बहाल करो।”
छात्रों ने यह भी दावा किया कि विश्वविद्यालय के सभी गेट और प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए है। छात्र संगठनों ने एक बयान में आरोप लगाया कि सुरक्षा गार्ड और विश्वविद्यालय के सुरक्षा सलाहकार परिसर के द्वारों पर छात्रों को पुलिस के हवाले कर रहे थे, जिसके कारण उन्हें मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जा रहा था और गिरफ्तार किया जा रहा था।
सोमवार को जारी एक नोटिस के अनुसार, ऑनलाइन कक्षाएं आठ नवंबर तक जारी रहेंगी, जिसके बाद विश्वविद्यालय स्थिति की समीक्षा करेगा। विश्वविद्यालय के इस आदेश के तहत मौजूदा प्रदर्शन के दौरान छात्रों को जारी किए गए निलंबन आदेश और कारण बताओ नोटिस भी वापस ले लिए गए। इसके अलावा, आंदोलन के दौरान सुरक्षाकर्मियों के आचरण की जांच के लिए एक समिति गठित करने का भी प्रावधान किया गया। हालांकि, छात्रों का कहना है कि यह फैसला पूरी तरह उनकी मांगों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने संविधान को मंजूरी देने की समयसीमा तय न होने पर सवाल उठाए हैं।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे विद्यार्थियों में से एक रेहान खान ने सोमवार को कहा, “हमारी पहली मांग यह थी कि छात्र संघ चुनाव बहाल किए जाएं और चुनाव की तारीखों का ऐलान किया जाए।” विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार देर रात खान को एक आदेश जारी कर प्रदर्शन स्थल तुरंत खाली करने को कहा और ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी। विश्वविद्यालय के आदेश में यह भी कहा गया कि प्रदर्शनकारी छात्र आंदोलन के दौरान प्रशासन के खिलाफ दिए गए मानहानिकारक बयानों, कृत्यों या सोशल मीडिया पोस्ट के लिए संवाददाता सम्मेलन में सार्वजनिक रूप से माफी मांगने पर सहमत हुए थे।
आदेश में ऐसे पोस्ट तुरंत हटाने के निर्देश देते हुए कहा गया था कि आदेश जारी होने के बाद प्रदर्शन समाप्त कर दिया जाएगा। सोमवार को परिसर में सुरक्षा बढ़ाए जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्रों और अर्धसैनिक बलों के जवानों के बीच झड़प भी हुई। तनाव के बीच सभी पाठ्यक्रमों की कक्षाएं ऑनलाइन कर दी गईं। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी कर रहे विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया।