Saurabh Pandey | June 15, 2026 | 10:43 AM IST | 2 mins read
इसरो (ISRO) ने छात्र इनोवेटर्स के लिए 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन 2026' की शुरुआत की है, जिसके तहत 1 जुलाई 2026 तक मुफ्त पंजीकरण किया जा सकता है।

नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 'भारतीय अंतरिक्ष हैकाथॉन' (BAH) 2026 के तीसरे संस्करण की शुरुआत कर दी है। इस राष्ट्रीय पहल का मुख्य उद्देश्य देश के तेजी से बढ़ते स्पेस-टेक इकोसिस्टम में छात्र इनोवेटर्स के नए विचारों को शामिल करना है। इनोवेशन प्लेटफॉर्म 'Hack2skill' के सहयोग से आयोजित होने वाले इस हैकाथॉन के जरिए भारत की कुछ सबसे जटिल खगोलीय और जलवायु संबंधी चुनौतियों के समाधान खोजे जाएंगे।
इस हैकाथॉन के लिए पंजीकरण और आइडिया सबमिशन करने की प्रक्रिया 10 जून 2026 से शुरू हो चुकी है। आवेदन करने की अंतिम तिथि 1 जुलाई 2026 निर्धारित की गई है। प्रतिभागियों को तकनीकी बारीकियों को समझाने के लिए इसरो 15 और 16 जून को विशेष एक्सप्लेनर सेशन (स्पष्टीकरण सत्र) भी आयोजित कर रहा है। इसके बाद, शॉर्टलिस्ट की गई टीमों की घोषणा 20 जुलाई 2026 को की जाएगी, जिसके बाद 21 जुलाई को एक इंडक्शन सेशन होगा। प्रतियोगिता का 30 घंटे का लाइव ग्रैंड फिनाले 6 और 7 अगस्त 2026 को आयोजित किया जाएगा।
इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए कुछ कड़े नियम तय किए गए हैं। यह हैकाथॉन केवल उन अंडरग्रेजुएट (UG), पोस्टग्रेजुएट (PG) और पीएचडी (PhD) रिसर्च स्कॉलर्स के लिए खुला है, जो वर्तमान में किसी मान्यता प्राप्त भारतीय संस्थान में नामांकित हैं। कामकाजी पेशेवर इसमें भाग लेने के पात्र नहीं हैं। प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए टीम में 3 से 4 सदस्य होने चाहिए। छात्रों को विभिन्न कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के साथ मिलकर 'क्रॉस-यूनिवर्सिटी' टीम बनाने की भी छूट दी गई है।
इस हैकाथॉन के लिए इसरो ने 15 विशेष प्रॉब्लम स्टेटमेंट्स (चुनौतियां) जारी किए हैं, जो अंतरिक्ष अन्वेषण (Space Exploration) को पृथ्वी पर संसाधन प्रबंधन के साथ जोड़ते हैं। इनमें भारत की जलवायु का एआई-पावर्ड 'डिजिटल ट्विन' विकसित करना और भविष्य के रोवर अभियानों के लिए चंद्रयान-2 के रडार डेटा का विश्लेषण करके चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में उप-सतह बर्फ का अध्ययन करना शामिल है। इसके अलावा, आदित्य-एल1 के डेटा का उपयोग करके सौर ज्वालाओं (Solar Flares) का पूर्वानुमान लगाना और सैटेलाइट तस्वीरों से बादलों को हटाने के लिए जेनरेटिव एआई का उपयोग करना जैसी चुनौतियां भी शामिल हैं।
इस हैकाथॉन में भाग लेने के लिए कोई शुल्क नहीं है, यानी यह पूरी तरह से मुफ्त है। इच्छुक टीमें 'Hack2skill' के आधिकारिक इवेंट पोर्टल के माध्यम से आवेदन कर सकती हैं। पंजीकरण के समय छात्रों को कोई भौतिक प्रोटोटाइप (मॉडल) बनाने की आवश्यकता नहीं है, बल्कि केवल एक विस्तृत वैचारिक समाधान प्रस्ताव (Conceptual Solution Proposal) सबमिट करना होगा।
चुने गए फाइनलिस्टों को इसरो के वैज्ञानिकों से तकनीकी मार्गदर्शन (Mentorship) मिलेगा और उन्हें इसरो के लाइव स्पेस प्रोजेक्ट्स पर काम करने के लिए इंटर्नशिप का अवसर भी मिल सकता है। साथ ही, फिनाले के लिए चुने गए छात्रों को द्वितीय श्रेणी (II AC) का यात्रा किराया भी वापस (Reimburse) किया जाएगा।