Press Trust of India | July 10, 2026 | 07:18 PM IST | 2 mins read
याचिकाओं में 'दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025' को पक्षपातपूर्ण, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताकर चुनौती दी गई है।

नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने नए शुल्क नियमन कानून के तहत 'स्कूल स्तर शुल्क नियामक समिति' (एसएलएफआरसी) गठित करने संबंधी शिक्षा निदेशालय के परिपत्र के खिलाफ निजी स्कूलों की याचिकाओं पर शुक्रवार को दिल्ली सरकार से जवाब मांगा। याचिकाओं में 'दिल्ली स्कूल शिक्षा (शुल्क निर्धारण और विनियमन में पारदर्शिता) अधिनियम, 2025' को पक्षपातपूर्ण, मनमाना और दुर्भावनापूर्ण बताकर चुनौती दी गई है। मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने स्कूलों की अर्जी पर नोटिस जारी किया और सरकार से आपत्तियां दाखिल करने को कहा।
संगठन 'एक्शन कमेटी अनएडेड रिकॉग्नाइज्ड प्राइवेट स्कूल्स' के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि एसएलएफआरसी का गठन न कर पाने की वजह से अधिकारियों द्वारा की जाने वाली किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से उन्हें बचाया जाए।
मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने कहा कि मुख्य मामले की सुनवाई 20 जुलाई को होनी है और अगर इस बीच कोई प्रतिकूल कार्रवाई की जाती है, तो याचिकाकर्ता पीठ से संपर्क कर सकता है।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि कोर्ट द्वारा मौजूदा शैक्षणिक सत्र के लिए एसएफआरसी बनाने के लिए निजी स्कूलों को दिए गए सरकार के 1 फरवरी के आदेश पर स्थगन लगाए जाने के बावजूद 30 जून को ''वैसा ही'' परिपत्र जारी किया गया।
दिल्ली सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा कि 28 फरवरी को अदालत ने स्कूलों के लिए एसएलएफआरसी बनाने संबंधी कानूनी आदेश के क्रियान्वयन पर रोक नहीं लगाई थी।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने 28 फरवरी को दिल्ली सरकार के उस आदेश के क्रियान्वयन को रोक दिया था जिसमें निजी स्कूलों से शैक्षणिक सत्र के लिए एसएलएफआरसी बनाने को कहा गया था।
एसएलएफआरसी के गठन पर दिल्ली सरकार की 1 फरवरी की अधिसूचना को रोकते हुए, अदालत ने कहा था कि स्कूल शैक्षणिक वर्ष 2026-2027 के लिए उतनी ही फीस ले सकेंगे जितनी उन्होंने पिछले शैक्षणिक वर्ष में ली थी।
नए ढांचे के तहत, हर निजी स्कूल को एक एसएसएफआरसी बनानी होगी। इस समिति में स्कूल प्रबंधन के प्रतिनिधि, प्रधानाचार्य, तीन शिक्षक, पांच माता-पिता और शिक्षा निदेशालय का एक नामित व्यक्ति शामिल होना चाहिए।
इस अधिनियम को कई निजी स्कूलों ने चुनौती दी है; जिसे दिल्ली की रेखा गुप्ता सरकार द्वारा 14 अगस्त, 2025 को अधिसूचित किया गया था और उसी साल 10 दिसंबर को यह लागू हुआ था।